


पूर्णिया। पूर्णिया स्थित विद्या विहार आवासीय विद्यालय के रमेश चंद्र मिश्रा सभागार में आयोजित तीन दिवसीय “ज्ञान संगम 2026” का तृतीय एवं अंतिम दिवस रविवार को अत्यंत गरिमामय, विचारोत्तेजक और उत्साहपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। सब हिमालयन रिसर्च इंस्टीट्यूट (SHRI) द्वारा आयोजित यह साहित्यिक एवं सांस्कृतिक महोत्सव अपने अंतिम दिन भी ज्ञान, भाषा विविधता, युवा सृजन और सांस्कृतिक विमर्श का सशक्त मंच बना रहा।
इस महोत्सव का शुभारंभ 24 अप्रैल को दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ था। तीनों दिनों तक पुस्तक स्टॉल, कला प्रदर्शनी और विविध सांस्कृतिक गतिविधियाँ लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं। अंतिम दिन भी पूर्णिया एवं आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी, साहित्यप्रेमी, छात्र-छात्राएं, प्राध्यापक और शिक्षाविद शामिल हुए और सभी ने विभिन्न सत्रों में सक्रिय सहभागिता निभाई।
कार्यक्रम के पहले सत्र में “Poetry of Our Time (Other Languages)” विषय पर चर्चा आयोजित की गई, जिसे किफायतुल्लाह को समर्पित किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता श्री मृत्युंजय कुमार सिंह ने की। विभिन्न भाषाओं की समकालीन कविता पर डॉ. हरिप्रियारी देवी थोकचोम, श्री यमुना प्रसाद बसाक, श्री कपिल देव कल्याणी, प्रो. एस. एल. वर्मा, श्री सदानंद सुमन और श्री राजा पुनियानी ने अपने विचार प्रस्तुत किए।
दूसरे सत्र में “उपन्यास और सामाजिक यथार्थ” विषय पर विमर्श हुआ, जिसे सतीनाथ भादुड़ी को समर्पित किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. मनींद्र नाथ ठाकुर ने की। इसमें श्री चंद्रकिशोर जायसवाल, डॉ. मनोज प्रशर और डॉ. बंदना भारती ने समाज और साहित्य के अंतर्संबंधों पर गहन विचार रखे।
तीसरे सत्र में “सृजन के लोक रंग – युवा प्रतिभाओं के साथ” विषय पर चर्चा हुई, जिसे अनुप लाल मंडल को समर्पित किया गया। प्रो. देवेंद्र कुमार चौबे की अध्यक्षता में आयोजित इस सत्र में मैत्री वर्मा, श्री पंकज कुमार सिंह, श्री विनायक रंजन और जोएल गुहा ने युवा लेखन और सृजन के नए आयामों पर अपने विचार साझा किए।
चौथे सत्र में “राउंड टेबल” चर्चा का आयोजन किया गया, जिसे बलई चंद मुखोपाध्याय (बनफूल) को समर्पित किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. रत्नेश्वर मिश्रा ने की। इसमें प्रो. देवेंद्र कुमार चौबे, पुष्यमित्र और सविता सिंह ने “पूर्णिया और आसपास के क्षेत्रों की साहित्यिक विरासत को कैसे पुनर्स्थापित किया जाए तथा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक जगत को कैसे समृद्ध किया जाए” विषय पर गंभीर और सार्थक चर्चा की।
समापन अवसर पर भव्य पुरस्कार समारोह आयोजित किया गया, जिसमें “श्री गुलाब प्रशांत हिंदी युवा साहित्य पुरस्कार” तथा “श्री गुलाब प्रशांत क्षेत्रीय युवा साहित्य पुरस्कार” प्रदान किए गए।
कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. रमन (सहायक निदेशक, SHRI) ने किया, जिनके कुशल संचालन से सभी सत्र प्रभावशाली और सुव्यवस्थित रहे।
इस आयोजन में वीवीआईटी के एनएसएस स्वयंसेवकों ने श्री राहुल (कार्यक्रम पदाधिकारी) के नेतृत्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वयंसेवकों ने आगंतुकों के मार्गदर्शन, अनुशासन व्यवस्था और कार्यक्रम संचालन में सक्रिय सहयोग दिया।
महोत्सव में लगे पुस्तक स्टॉल प्रमुख आकर्षण रहे, जिनमें राजकमल प्रकाशन, सेतु प्रकाशन, प्रगतिशील प्रकाशन, वाणी प्रकाशन, रचनाकार, प्रखर गूंज प्रकाशन और अद्वैत प्रकाशन शामिल रहे।
इसके साथ ही कला एवं संस्कृति से जुड़ी विभिन्न प्रदर्शनियों ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। इनमें मणिपुरी बैम्बू आर्किटेक्चर आर्ट, गुल्लू गैलरी की टिंकी कुमारी की चित्रकला प्रदर्शनी, किलकारी बाल भवन की चित्रकला, टेक्सटाइल कला, लिप्पन पेंटिंग, किलकारी पत्रिका एवं क्राफ्ट प्रदर्शनी तथा वीवीआईटी की चित्रकला प्रदर्शनी शामिल रहीं।
इस भव्य आयोजन में व्यक्तिगत सहयोग के रूप में गुलाब नारायण झा और प्रशांत कुमार झा (डालू स्मृति न्यास) का योगदान सराहनीय रहा। वहीं स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, वीवीआईटी, वीवीआरएस, कैरियर प्लस, पावरग्रिड, INTACH, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, आईडीबीआई बैंक और जनमन फाउंडेशन सहित कई संस्थाओं का महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम में पूर्णिया के एडीएम (लॉ एंड ऑर्डर) श्री राजकुमार गुप्ता की गरिमामयी उपस्थिति भी रही, जिसने आयोजन की प्रतिष्ठा को और बढ़ाया।
अंत में विद्या विहार आवासीय विद्यालय के सचिव एवं वीवीआईटी के अध्यक्ष श्री राजेश चंद्र मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी सहयोगी संस्थाओं, अतिथियों, विद्वानों, प्रतिभागियों, स्वयंसेवकों और उपस्थित जनसमूह के प्रति आभार व्यक्त किया।
तीन दिवसीय “ज्ञान संगम 2026” का यह समापन दिवस साहित्य, संवाद, युवा सृजन और सांस्कृतिक चेतना का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा, जिसने सभी के मन पर अमिट छाप छोड़ी।
















