


भागलपुर। 29 अप्रैल को मनाए जाने वाले International Dance Day के अवसर पर भागलपुर कथक केंद्र के निदेशक एवं प्रसिद्ध कथक गुरु निभास मोदी ने शहरवासियों और कला प्रेमियों को शुभकामनाएं दीं। इस मौके पर उन्होंने नृत्य और संगीत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये केवल मनोरंजन के साधन नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और समृद्ध बनाने का आधार हैं।

निभास मोदी ने कहा, “नृत्य और संगीत के बिना जीवन अधूरा है। यह हमारी संस्कृति, परंपरा और भावनाओं की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है।” उन्होंने विशेष रूप से Kathak का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य हमारी सभ्यता की गहराई और समृद्ध विरासत को दर्शाता है। नृत्य के माध्यम से व्यक्ति अपनी भावनाओं को सहज रूप से व्यक्त कर सकता है और मानसिक रूप से भी स्वस्थ रहता है।
उन्होंने कहा कि आज के भागदौड़ भरे जीवन में नृत्य और संगीत मन को शांति देने के साथ-साथ नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। युवाओं से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में जहां लोग मोबाइल और इंटरनेट में अधिक व्यस्त हो गए हैं, वहां कला से जुड़ाव उन्हें सकारात्मक दिशा दे सकता है। नृत्य आत्मविश्वास बढ़ाता है, अनुशासन सिखाता है और व्यक्तित्व को निखारता है।

भागलपुर कथक केंद्र की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए निभास मोदी ने बताया कि उनके संस्थान के कई छात्र-छात्राएं देश-विदेश में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। कई विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिल चुका है, वहीं कुछ विभिन्न उच्च पदों पर कार्यरत रहते हुए भी नृत्य कला को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके शिष्य सांस्कृतिक मंचों और संस्थानों के माध्यम से इस परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहे हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि कथक केंद्र में वर्षों से नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जहां बच्चों से लेकर युवाओं तक को शास्त्रीय नृत्य की बारीकियां सिखाई जाती हैं। यहां अनुशासन, समर्पण और परंपरा पर विशेष ध्यान दिया जाता है, ताकि छात्र न केवल कुशल कलाकार बनें, बल्कि एक बेहतर व्यक्तित्व का भी विकास कर सकें।
अंत में निभास मोदी ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस हमें अपनी कला और संस्कृति के महत्व की याद दिलाता है। उन्होंने सभी लोगों से आग्रह किया कि वे नृत्य और संगीत को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं और भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने में योगदान दें।















