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ऑनलाइन मंचों पर उपलब्ध, डिजिटल दौर की अभिव्यक्ति और संघर्ष की कहानी

पूर्णिया महाविद्यालय में बीसीए शिक्षक के रूप में कार्यरत युवा लेखक Abu Fazal की पहली पुस्तक ‘क्लिक से किताब तक’ प्रकाशित हो गई है। यह पुस्तक अब देश के प्रमुख ऑनलाइन बिक्री मंचों पर उपलब्ध है। पुस्तक के प्रकाशन के बाद शिक्षा और साहित्य जगत में खुशी का माहौल है।


यह पुस्तक वर्तमान डिजिटल दौर के उन लोगों की कहानी को सामने लाती है, जो लिखना तो चाहते हैं, लेकिन समाज के डर, हिचकिचाहट और आलोचना के भय से अपने विचारों को सार्वजनिक नहीं कर पाते। पुस्तक में लेखक ने आधुनिक समय में अभिव्यक्ति के बदलते स्वरूप और रचनात्मक संघर्ष को सरल एवं भावनात्मक शैली में प्रस्तुत किया है।

पुस्तक का मुख्य विचार इस सवाल के इर्द-गिर्द घूमता है कि क्या एक छोटा सा प्रयास किसी व्यक्ति की पूरी जिंदगी बदल सकता है। लेखक ने इस पुस्तक में एक ऐसे सफर को शब्दों में पिरोया है, जो मोबाइल की छोटी स्क्रीन से शुरू होकर एक प्रकाशित पुस्तक तक पहुंचता है।

लेखक का कहना है कि इस पुस्तक में केवल शब्द नहीं लिखे गए हैं, बल्कि जीवन के अनुभव, संघर्ष, सपने और आत्मविश्वास को भी जीवंत किया गया है। यह पुस्तक उन युवाओं को प्रेरित करती है, जो अपनी प्रतिभा को सामने लाना चाहते हैं लेकिन परिस्थितियों और सामाजिक दबाव के कारण पीछे हट जाते हैं।


लेखन यात्रा के दौरान लेखक को Srijanatmak Pathshala नामक साहित्यिक समूह से लगातार प्रेरणा और सहयोग मिलता रहा। लेखक ने बताया कि इस समूह ने उनकी रचनात्मक सोच को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अबू फ़ज़ल का मानना है कि सामाजिक माध्यम आज अभिव्यक्ति का एक मजबूत मंच बन चुका है, जहां सराहना और आलोचना दोनों ही व्यक्ति को आगे बढ़ने की शक्ति देती हैं। उन्होंने कहा कि यदि युवा अपनी सोच और प्रतिभा को सही दिशा दें, तो डिजिटल माध्यम उनके सपनों को साकार करने का रास्ता बन सकते हैं।

पुस्तक के प्रकाशन पर शिक्षकों, विद्यार्थियों और साहित्य प्रेमियों ने लेखक को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। लोगों ने इसे युवाओं के लिए प्रेरणादायक प्रयास बताया है।

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