


पर्यावरण दिवस पर पौधे लगाकर किया गया पर्यावरण संरक्षण
गोपालपुर
जहां एक ओर आधुनिकता और विकास की अंधी दौड़ में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से पर्यावरण संतुलन लगातार बिगड़ रहा है, वहीं नवगछिया अनुमंडल के गोपालपुर प्रखंड स्थित धरहरा गांव वर्षों से पर्यावरण संरक्षण और बेटी सम्मान का ऐसा संदेश दे रहा है, जो पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन चुका है। यहां बेटी के जन्म पर फलदार पौधे लगाने की परंपरा न केवल हरियाली बढ़ा रही है, बल्कि बेटियों के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता की भी अनूठी मिसाल पेश कर रही है।
धरहरा में जब भी किसी घर में बेटी जन्म लेती है, उसके नाम पर आम, लीची, अमरूद समेत विभिन्न फलदार पौधे लगाए जाते हैं। परिवार के सदस्य इन पौधों की देखभाल उसी स्नेह और जिम्मेदारी से करते हैं, जैसे अपनी बेटी की परवरिश करते हैं। वर्षों की मेहनत और संरक्षण का परिणाम है कि आज ये पौधे विशाल वृक्षों का रूप ले चुके हैं और गांव को हरियाली से आच्छादित कर रहे हैं।

धरहरा की इस अनूठी पहल ने राज्य ही नहीं, देशभर का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। इसी परंपरा से प्रभावित होकर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी तीन बार गांव पहुंच चुके हैं।
वही लवी कुमारी के पिता सौरभ सिंह बताते हैं कि उनके परिवार ने पौधे को बेटी की तरह ही प्यार और संरक्षण दिया।
विशेष बात यह है कि जिस लवी कुमारी के नाम पर वर्ष 2010 में पूर्व मुख्यमंत्री ने पहला पौधा लगाया था, वह आज 18 वर्ष की हो चुकी हैं और पर्यावरण संरक्षण की मजबूत पक्षधर बनकर उभरी हैं। जहां शुक्रवार को पर्यावरण दिवस पर फलदर को संरक्षण करते हुए पानी से सिंचाई किया।उन्होंने मैट्रिक और इंटरमीडिएट प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण किया है तथा कृषि क्षेत्र में आगे बढ़ने की तैयारी कर रही हैं।

लवी कहती हैं कि पर्यावरण दिवस केवल एक दिन मनाने का अवसर नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण का संकल्प लेने और उसे हर दिन निभाने का संदेश है।उनका मानना है कि पर्यावरण संरक्षण का अर्थ केवल पौधे लगाना तक ही सीमित नहीं, बल्कि प्रकृति द्वारा प्रदान किए गए सभी संसाधनों की रक्षा करना है।















