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पूर्णिया जिले में संभावित बाढ़ एवं सुखाड़ की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सोमवार को समाहरणालय स्थित महानंदा सभागार में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग के मंत्री सह पूर्णिया जिला प्रभारी मंत्री रत्नेश सादा ने की। बैठक में भवन निर्माण मंत्री लेशी सिंह, पूर्णिया सांसद, जिले के सभी विधायक, जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार, पुलिस अधीक्षक स्वीटी सहरावत, अनुमंडल पदाधिकारी, डीसीएलआर एवं विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय पदाधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक की शुरुआत आपदा में जान गंवाने वाले पांच मृतकों के आश्रितों को राहत प्रदान करने से हुई। प्रभारी मंत्री ने विभिन्न आपदाओं में मृत हुए लोगों के परिजनों को कुल 20 लाख रुपये की अनुग्रह अनुदान राशि के चेक प्रदान किए।

बैठक में “आपदा नहीं हो भारी, अगर हो पूर्व तैयारी” के मूल मंत्र के साथ जिले की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई। जिला प्रशासन द्वारा पावर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से बताया गया कि जिले के सभी सात तटबंधों का संबंधित अनुमंडल पदाधिकारियों एवं कार्यपालक अभियंताओं द्वारा संयुक्त निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत कार्य पूरा कर लिया गया है। प्रभारी मंत्री ने तटबंधों पर हो रहे कार्यों की लगातार निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

जिले में बाढ़ एवं कटाव से सुरक्षा के लिए अमौर, बैसा और बायसी प्रखंडों के कुल 13 स्थलों पर कटावरोधी कार्य चल रहा है। इन कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए फ्लड कंट्रोल डिवीजन एवं संबंधित अधिकारियों को नियमित अनुश्रवण का निर्देश दिया गया।

प्रशासन ने बताया कि बाढ़ के दौरान फ्लड फाइटिंग के लिए बालू, बोल्डर, लोहे के जाल एवं बोरों की पर्याप्त व्यवस्था कर ली गई है। संवेदनशील स्थलों पर अभियंताओं की विशेष प्रतिनियुक्ति की जाएगी। जिले में फिलहाल 29 सरकारी एवं 80 निजी नावों की व्यवस्था की गई है।

बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए 344 बाढ़ आश्रय स्थल एवं 291 सामुदायिक रसोई केंद्र चिन्हित किए गए हैं। राहत सामग्री की पैकेजिंग के लिए जिले के सभी प्रखंड मुख्यालयों पर कुल 14 केंद्र बनाए गए हैं। पॉलीथीन शीट्स का भी पर्याप्त भंडारण किया गया है।

स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों की समीक्षा के दौरान बताया गया कि बाढ़ अवधि में लोगों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 18 चलंत, 45 स्थायी एवं 40 अस्थायी मेडिकल टीमों का गठन किया गया है। सभी स्वास्थ्य संस्थानों में एंटी स्नेक वेनम, एंटी रेबीज वैक्सीन, ओआरएस सहित आवश्यक दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।

पीने के पानी एवं स्वच्छता व्यवस्था के तहत जिले के 2783 चापाकलों की मरम्मत का कार्य शत-प्रतिशत पूरा कर लिया गया है। बाढ़ आश्रय स्थलों पर 120 चापाकल एवं 280 शौचालयों की व्यवस्था की जा रही है। सुदूर क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए दो जलदूत वाहन भी तैयार रखे गए हैं।

पशुपालन विभाग द्वारा पशुओं के लिए चारा एवं दवाओं की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। पशुओं के लिए 42 ऊंचे शरण स्थल चिन्हित किए गए हैं, जबकि 42 प्रकार की आवश्यक पशु दवाएं भंडारित कर ली गई हैं।

कृषि विभाग ने संभावित बाढ़ एवं सुखाड़ को देखते हुए आकस्मिक फसल योजना तैयार कर ली है। मार्च-अप्रैल में हुई बेमौसम बारिश एवं आंधी से प्रभावित किसानों को कृषि इनपुट अनुदान डीबीटी के माध्यम से उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी है।

आपदा प्रबंधन के तहत एसडीआरएफ द्वारा 500 आपदा मित्रों एवं 1400 स्कूली बच्चों को सुरक्षित तैराकी एवं बाढ़ बचाव का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। वहीं हीट वेव से निपटने के लिए अस्पतालों में 48 वातानुकूलित बेड सुरक्षित रखे गए हैं तथा नगर निकाय क्षेत्रों में 107 सार्वजनिक प्याऊ संचालित किए जा रहे हैं।

बैठक के अंत में प्रभारी मंत्री रत्नेश सादा ने सभी विभागों को आपसी समन्वय स्थापित कर 24 घंटे सतर्क रहने तथा किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी बनाए रखने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा, राहत और त्वरित सहायता सुनिश्चित करना है तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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