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प्रदीप विद्रोही

भागलपुर।
बिहार की प्रतिभा ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का गौरव बढ़ाया है। विश्व प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार ने अपनी रेत कला के दम पर ऐसा इतिहास रचा है, जो अब तक दुनिया में कोई अन्य सैंड आर्टिस्ट नहीं बना सका। उन्हें अमेरिका इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, हॉलीवुड (कैलिफ़ोर्निया) द्वारा सैंड आर्ट के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए ऑनरेरी डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (मानद डॉक्टरेट) की उपाधि से सम्मानित किया गया है। इसके साथ ही वे दुनिया के पहले अंतरराष्ट्रीय सैंड आर्टिस्ट बन गए हैं, जिन्हें इस विधा में यह प्रतिष्ठित अकादमिक सम्मान प्राप्त हुआ है।

यह सम्मान विश्वविद्यालय की सीनेट द्वारा शिक्षा विभाग के निर्धारित नियमों के तहत प्रदान किया गया। विश्वविद्यालय ने मधुरेंद्र कुमार को रेत कला के माध्यम से सामाजिक जागरूकता फैलाने, भारतीय संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने तथा कला को जनहित और सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बनाने में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए इस सर्वोच्च सम्मान से नवाजा।

26 जून 2026 को हॉलीवुड (कैलिफ़ोर्निया) स्थित विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित विशेष समारोह में उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई। सम्मान-पत्र पर विश्वविद्यालय के संस्थापक एवं चांसलर डॉ. सांग वॉन पार्क तथा रजिस्ट्रार क्युंग बाई एन के संयुक्त हस्ताक्षर अंकित हैं। विश्वविद्यालय द्वारा जारी प्रमाणपत्र का पंजीकरण संख्या AIU/6054/2026 है।

मधुरेंद्र कुमार वर्षों से समुद्र तट और नदी किनारे की रेत को अपनी कल्पनाशीलता का कैनवास बनाकर सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर कलाकृतियां तैयार करते रहे हैं। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, स्वच्छता अभियान, मतदान जागरूकता, राष्ट्रीय एकता, मानवाधिकार और सामाजिक सद्भाव जैसे अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर रेत कला के माध्यम से लोगों को जागरूक किया है। उनकी कलाकृतियों को देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी व्यापक सराहना मिली है।

कला विशेषज्ञों का मानना है कि यह सम्मान केवल मधुरेंद्र कुमार की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय सैंड आर्ट, लोक सृजन और सांस्कृतिक विरासत की वैश्विक पहचान का प्रतीक है। उन्होंने अपनी रचनात्मक प्रतिभा से यह सिद्ध किया है कि रेत जैसी क्षणभंगुर सामग्री भी समाज को स्थायी संदेश देने का सशक्त माध्यम बन सकती है।

मधुरेंद्र कुमार की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से बिहार के साथ-साथ पूरे देश का सम्मान बढ़ा है। कला जगत, शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों तथा देश-विदेश में उनके प्रशंसकों ने उन्हें बधाई देते हुए इसे भारतीय सैंड आर्ट के इतिहास का स्वर्णिम क्षण बताया है।

कला प्रेमियों का कहना है कि मधुरेंद्र कुमार ने अपनी अथक मेहनत, सृजनात्मक सोच और सामाजिक प्रतिबद्धता के बल पर यह साबित कर दिया है कि यदि प्रतिभा को सही दिशा और समर्पण मिले, तो वह विश्व मंच पर भी अपनी अलग पहचान बना सकती है। उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के कलाकारों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

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