


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। महात्मा गांधी के अंग प्रदेश आगमन के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक ऐसा प्रयास शुरू किया गया है, जो इस क्षेत्र के इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन के अनछुए अध्यायों को नई पहचान देगा। 7 से 9 अगस्त तक आयोजित होने वाले ‘अंग प्रदेश में महात्मा गांधी राष्ट्रीय समारोह’ के दौरान पहली बार गांधी के अंग प्रदेश से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भों पर एक विशेष शोध ग्रंथ प्रकाशित किया जाएगा।
समारोह के संयोजक प्रसून लतांत ने बताया कि ‘अंग प्रदेश में महात्मा गांधी : संदर्भ और संदेश’ विषय पर देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के शोधार्थियों, शिक्षकों और विद्वानों से शोधपरक लेख आमंत्रित किए गए हैं। उद्देश्य गांधी के चार बार के अंग प्रदेश आगमन, उनके सामाजिक प्रभाव और स्वतंत्रता आंदोलन में इस क्षेत्र की भूमिका को नए सिरे से दस्तावेज़ करना है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का मार्गदर्शन गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र के अध्यक्ष प्रकाश चंद्र गुप्ता और गांधीवादी लेखक डॉ. मनोज कुमार कर रहे हैं। संपादकीय टीम में डॉ. सुनील अग्रवाल, डॉ. उमेश प्रसाद नीरज, डॉ. रविशंकर चौधरी, डॉ. सुधीर मंडल और ई. सागर शर्मा शामिल हैं।
शोध ग्रंथ में केवल गांधी ही नहीं, बल्कि अंग प्रदेश के उन गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों पर भी लेख शामिल किए जाएंगे, जिनका योगदान समय के साथ धुंधला पड़ गया। इनमें दीप नारायण सिंह, बोध नारायण मिश्र, दामिनी देवी, सियाराम सिंह, आनंद मोहन सहाय, आशा सहाय चौधरी, सतीश चंद्र झा, मजहरूल हक, तेज नारायण सिंह, शुभ करण चूड़ीवाला और केदार प्रसाद मंडल जैसे नाम शामिल हैं।
इसके अलावा युवा और उद्यम, किसान और गांधी, महिला सशक्तिकरण, बाल विवाह, हिंसा मुक्त समाज तथा नशा मुक्ति जैसे समकालीन विषयों पर भी शोध लेख आमंत्रित किए गए हैं। प्रकाशित ग्रंथ का लोकार्पण समारोह के उद्घाटन सत्र में देशभर से आने वाले विशिष्ट अतिथियों द्वारा किया जाएगा।
समारोह की एक और खास आकर्षण राजकमल प्रकाशन का पुस्तक मेला होगा, जहां गांधी साहित्य और उनसे जुड़े महत्वपूर्ण प्रकाशनों की व्यापक श्रृंखला पाठकों के लिए उपलब्ध रहेगी।
यह पहल न केवल गांधी के अंग प्रदेश से जुड़े ऐतिहासिक संबंधों को नई पीढ़ी तक पहुंचाएगी, बल्कि क्षेत्र के भूले-बिसरे स्वतंत्रता सेनानियों और सामाजिक विरासत को भी राष्ट्रीय विमर्श में स्थान दिलाने का प्रयास मानी जा रही है।

















