


नवगछिया :
आषाढ़ शुक्ल एकादशी के अवसर पर शनिवार से चातुर्मास का शुभारंभ होगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और अगले चार माह तक चातुर्मास की अवधि रहती है। इसका समापन कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवोत्थान एकादशी) पर नवंबर माह में होगा।
चातुर्मास के दौरान विवाह, गृहप्रवेश एवं अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। वहीं जप, तप, दान, व्रत, सत्संग तथा भगवान विष्णु की आराधना का विशेष महत्व माना गया है। श्रद्धालु इस अवधि में धार्मिक अनुष्ठानों एवं आध्यात्मिक साधना में विशेष रूप से भाग लेते हैं।

पंडित अमरनाथ झा ने बताया कि देवशयनी एकादशी के अवसर पर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, व्रत, भजन-कीर्तन एवं धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि चातुर्मास का समय आध्यात्मिक साधना, आत्मचिंतन एवं धर्म-कर्म के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धालु इस अवधि में भगवान विष्णु की आराधना कर सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना करते हैं।
















