


सबौर। सबौर महाविद्यालय के हिन्दी विभाग की ओर से शुक्रवार को मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर “प्रेमचंद की दृष्टि में सामाजिक न्याय” विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य प्रो. (डॉ.) संजय कुमार झा ने की।
मुख्य वक्ता डॉ. अमलेन्दु अंजन ने कहा कि प्रेमचंद के अनुसार मनुष्य की पहचान उसके धर्म या जाति से नहीं, बल्कि उसके जीवन-मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं से होती है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने अपने साहित्य के माध्यम से सामाजिक न्याय, समानता और मानवीय गरिमा का संदेश दिया। दूसरी मुख्य वक्ता डॉ. अनुश्री विजयिणी ने कहा कि प्रेमचंद का सामाजिक न्याय संबंधी चिंतन आज भी पूरी तरह प्रासंगिक है तथा उनकी रचनाएं सामाजिक असमानता और स्त्री विमर्श को नई दृष्टि प्रदान करती हैं।
आयोजन सचिव डॉ. राकेश रंजन ने प्रेमचंद को हिन्दी साहित्य का ध्रुवतारा बताते हुए कहा कि उनकी रचनाएं शोषित और वंचित समाज की आवाज हैं। अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य प्रो. (डॉ.) संजय कुमार झा ने कहा कि प्रेमचंद ने किसान, मजदूर, निम्न एवं मध्यम वर्ग के संघर्ष और शोषण को साहित्य में यथार्थ रूप में चित्रित किया। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य आज भी सामाजिक न्याय और मानवीय मूल्यों का सशक्त दस्तावेज है।
संगोष्ठी में महाविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया। मंच संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मयंक वत्स ने किया।
















