


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। श्रावणी मेले में जहां एक ओर ‘बोल बम’ के जयघोष से पूरा कांवरिया पथ शिवमय हो उठा है, वहीं दूसरी ओर इसी मार्ग पर नुक्कड़ नाटक और लोकगीतों के जरिए समाज और सरकार के महत्वपूर्ण संदेश भी श्रद्धालुओं तक पहुंचाए जा रहे हैं। भागलपुर जिला प्रशासन और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (आईपीआरडी) की यह पहल आस्था के साथ-साथ जनजागरूकता का भी अनोखा संगम बन गई है।

सुल्तानगंज से देवघर तक की कठिन पैदल यात्रा पर निकले लाखों कांवरियों के लिए विश्राम स्थलों और प्रमुख पड़ावों पर कलाकार लोकगीत, लोकनृत्य और नुक्कड़ नाटकों की प्रस्तुति दे रहे हैं। इन प्रस्तुतियों में मनोरंजन के साथ-साथ स्वच्छता, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, नशा मुक्ति, सड़क सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और सामाजिक सद्भाव जैसे विषयों पर प्रभावी संदेश दिए जा रहे हैं।
कार्यक्रमों के माध्यम से श्रद्धालुओं को राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दी जा रही है। कलाकार संवाद, गीत और अभिनय के जरिए योजनाओं को सरल भाषा में समझा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग इनका लाभ उठा सकें।
देवघर, बासुकीनाथ और अजगैबीनाथ जाने वाले कांवरिया मार्ग के प्रमुख स्थानों पर आयोजित इन कार्यक्रमों को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुट रहे हैं। कठिन यात्रा के बीच ये सांस्कृतिक प्रस्तुतियां कांवरियों के लिए कुछ पल का सुकून और मनोरंजन भी लेकर आ रही हैं।
भागलपुर की जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय ने कहा कि सरकारी योजनाओं और सामाजिक सरोकारों से जुड़े संदेशों को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए नुक्कड़ नाटक बेहद प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने बताया कि श्रावणी मेला समाप्त होने तक मेला क्षेत्र और कांवरिया पथ के विभिन्न प्रमुख स्थलों पर ऐसे कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु और स्थानीय लोग सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर सकें।
हर वर्ष श्रावणी मेले के दौरान देश के विभिन्न राज्यों के अलावा नेपाल और भूटान से भी लगभग 50 से 60 लाख श्रद्धालु सुल्तानगंज पहुंचते हैं। प्रशासन का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं तक जनहित के संदेश पहुंचाने का इससे बेहतर अवसर नहीं हो सकता। यही कारण है कि इस बार कांवरिया पथ केवल आस्था की राह नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता की एक जीवंत पाठशाला भी बन गया है।

















