


कोलकाता के शिवभक्तों की अनूठी कांवड़ यात्रा ने श्रावणी मेले में श्रद्धालुओं का जीता दिल
भागलपुर। विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला 2026 में शिवभक्ति के अनूठे स्वरूप लगातार देखने को मिल रहे हैं। सुलतानगंज से देवघर तक जाने वाले कांवरिया पथ पर लाखों शिवभक्त “बोल बम” के जयघोष के साथ बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ रहे हैं। इसी बीच कोलकाता से आए शिवभक्तों का एक जत्था अपनी विशाल और आकर्षक कांवड़ के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

इस अनोखी कांवड़ की सबसे बड़ी विशेषता इसमें स्थापित उज्जैन के महाकालेश्वर की भव्य झांकी, 100 लीटर गंगाजल से भरा विशाल कलश और राष्ट्रध्वज तिरंगे की थीम पर की गई आकर्षक सजावट है। कांवरिया पथ पर जहां-जहां यह कांवड़ पहुंच रही है, श्रद्धालु रुककर इसकी तस्वीरें ले रहे हैं और शिवभक्तों की मेहनत एवं आस्था की सराहना कर रहे हैं।
कोलकाता के काशीपुर निवासी शिवभक्त रघुनाथ राय ने बताया कि वह हर वर्ष बाबा बैद्यनाथ धाम की कांवड़ यात्रा करते हैं। इस बार भी वे 100 लीटर गंगाजल से भरे विशाल कलश के साथ यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कांवड़ पर उज्जैन के महाकालेश्वर की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है, जिसे पूरी तरह बांस, मटकी और अन्य पारंपरिक सामग्रियों की सहायता से हाथों से तैयार किया गया है। इस कांवड़ को तैयार करने में लगभग तीन महीने का समय लगा, जबकि इसका कुल वजन करीब 300 किलोग्राम है।
उन्होंने बताया कि उनके साथ 25 से 30 शिवभक्तों का जत्था यात्रा कर रहा है। भारी कांवड़ को एक समय में चार श्रद्धालु मिलकर उठाते हैं। सभी श्रद्धालु सुलतानगंज से गंगाजल लेकर पैदल बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए रवाना हुए हैं और 10 से 12 अगस्त के बीच जलाभिषेक करेंगे।
जत्थे के वरिष्ठ शिवभक्त बबाई ने बताया कि वह पिछले 15 वर्षों से लगातार कांवड़ यात्रा कर रहे हैं। पहले सामान्य कांवड़ लेकर बाबा धाम जाते थे, लेकिन वर्ष 2024 से विशाल कलश और विशेष थीम वाली कांवड़ यात्रा की शुरुआत की गई। उन्होंने बताया कि इस कांवड़ को साथियों के सहयोग से स्वयं तैयार किया गया है। इसके निर्माण में बांस, रस्सी, तार और अन्य आवश्यक सामग्रियों का उपयोग किया गया तथा लगभग 20 लोगों ने कई दिनों की मेहनत से इसे अंतिम रूप दिया।
उन्होंने बताया कि बाबा बैद्यनाथ धाम में जलाभिषेक करने के बाद पूरा जत्था बासुकीनाथ धाम भी जाएगा। इसके पश्चात 15 अगस्त को भूतनाथ से जल लेकर बाबा तारकनाथ धाम के लिए प्रस्थान करेगा। इसी कारण इस बार विशाल कलश को राष्ट्रध्वज तिरंगे की थीम पर सजाया गया है, जो शिवभक्ति के साथ-साथ राष्ट्रभक्ति का भी संदेश दे रहा है।
श्रावणी मेले में उज्जैन महाकाल की आकर्षक झांकी, 100 लीटर गंगाजल से भरा विशाल तिरंगा कलश और शिवभक्तों की अटूट आस्था श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। यह अनूठी कांवड़ यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि श्रद्धा, समर्पण, परिश्रम और देशभक्ति का भी प्रेरणादायी संदेश दे रही है।
















