


पूर्णिया प्रमंडल आदिवासी छात्र एवं युवा समिति की ओर से झील टोला बाघमारा स्थित स्थानीय फुटबॉल मैदान में आयोजित 15 दिवसीय 43वीं फुटबॉल चैंपियनशिप एवं खेलकूद प्रतियोगिता-2026 के आठवें दिन शनिवार को सरना फुटबॉल क्लब, पूर्णिया और महेंद्रपुर फुटबॉल क्लब, पूर्णिया के बीच मुकाबला खेला गया। हालांकि आयोजन से प्राप्त विवरण में विपक्षी टीम के नाम को एक स्थान पर स्टार क्लब गिरवा-बेतवा कस्बा बताया गया है। इस कारण टीम के नाम की आधिकारिक पुष्टि आयोजकों से अपेक्षित है।
मुकाबले में सरना फुटबॉल क्लब, पूर्णिया की ओर से जर्सी नंबर-12 के खिलाड़ी सुबोध खाखा ने खेल के 43वें मिनट में शानदार गोल कर अपनी टीम को बढ़त दिलाई। इसके बाद दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने गोल करने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन निर्धारित समय तक कोई अन्य गोल नहीं हो सका। इस तरह सरना फुटबॉल क्लब ने 1-0 से मुकाबला अपने नाम किया।

दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने पूरे मैच के दौरान बेहतरीन खेल का प्रदर्शन किया। मुकाबले में निर्णायक की भूमिका हर्षित आनंद, राहुल तिर्की, राजेश मुर्मू, रजनीश कुमार पांडेय, अमित लकड़ा, उपेंद्र बेसरा एवं अरुण मरांडी ने निभाई।
शानदार प्रदर्शन के लिए सरना फुटबॉल क्लब के जर्सी नंबर-12 खिलाड़ी सुबोध खाखा को मैन ऑफ द मैच चुना गया। उन्हें मोहनी पंचायत, कसबा प्रखंड के मुखिया श्याम सुंदर उरांव ने स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया।
आयोजकों के अनुसार प्रतियोगिता का अगला मुकाबला 9 अगस्त को अपराह्न 3:30 बजे से क्वार्टर फाइनल के रूप में खेला जाएगा। इसमें सरजोम बागान फुटबॉल क्लब, फलका, कटिहार और युवा शास्त्री फुटबॉल क्लब, भीमनगर, सुपौल के बीच मुकाबला होगा।
मैच में उद्घोषक की भूमिका बीरेंद्र मुर्मू ने निभाई। मौके पर पंचायती राज विभाग, बिहार सरकार, पटना से जुड़े दीपक प्रकाश, खाद्य विभाग से जुड़े अंगद कुशवाहा, राजेंद्र यादव सहित स्थानीय गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में फुटबॉल प्रेमी मौजूद रहे।
प्रतियोगिता के आयोजन में संयोजक मायाराम उरांव, सह-संयोजक हरी कुजूर, अध्यक्ष बीरेंद्र कुमार उरांव, उपाध्यक्ष विक्रम तिर्की एवं रविशंकर हेम्ब्रम, महासचिव नवीन लकड़ा, सचिव रावण उरांव, संयुक्त सचिव अजय उरांव, उपेंद्र बेसरा एवं बरुण कुमार, संगठन सचिव मनीष कुमार मिंज एवं शुभम आनंद, कोषाध्यक्ष मुकेश कुमार कुजूर, उपकोषाध्यक्ष राजेश मिंज, प्रवक्ता सुमित लकड़ा तथा मीडिया प्रभारी नाथु उरांव एवं प्रीतम लकड़ा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
















