


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। गंगा के घाट पर आस्था का सैलाब है और आगे 105 किलोमीटर का रास्ता। कंधे पर कांवर, हाथ में गंगाजल और जुबां पर सिर्फ एक नाम ‘बोल बम’। सुल्तानगंज से देवघर तक इन दिनों सड़क नहीं, मानो भगवा रंग की एक अनवरत धारा बह रही है।
शनिवार को सावन के दसवें दिन कच्चा कांवरिया पथ पूरी तरह कांवरियों के रंग में रंगा नजर आया। कोई नंगे पांव आगे बढ़ रहा है, कोई थकान के बावजूद कदम रोकने को तैयार नहीं। महिला, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे हर उम्र के श्रद्धालुओं की मंजिल एक ही है, बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक।
श्रावणी मेला शुरू होने के बाद अब तक 18 लाख से अधिक शिवभक्त सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर देवघर के लिए रवाना हो चुके हैं। शुक्रवार को ही पीपुल काउंटिंग मशीनों में 3 लाख 99 हजार 456 कांवरियों की आवाजाही दर्ज हुई। आंकड़े बता रहे हैं कि यह सिर्फ यात्रा नहीं, बल्कि आस्था का विशाल जनप्रवाह है।
85 किमी पर बिछी बालू, पांवों के लिए रास्ता मुलायम:
105 किलोमीटर के इस सफर में करीब 85 किलोमीटर का कच्चा रास्ता कांवरियों के लिए तैयार किया गया है। नंगे पांव चलने वाले शिवभक्तों के पैरों को राहत देने के लिए रास्ते पर महीन बालू बिछाई गई है।
धूप और उमस के बीच राहत के लिए जगह-जगह पानी की फुहारें छोड़ी जा रही हैं। टैंकरों से रास्ते पर पानी का छिड़काव हो रहा है। रात के सफर को आसान बनाने के लिए हाई-मास्ट लाइट और एलईडी स्ट्रिप से कांवरिया पथ को रोशन किया गया है। प्रमुख पड़ावों पर तोरण द्वार और भक्ति संगीत के लिए साउंड सिस्टम भी लगाए गए हैं।
कांवरियों के साथ चल रही है सुरक्षा की ‘अदृश्य नजर’:
भीड़ जितनी बड़ी है, निगरानी का नेटवर्क भी उतना ही मजबूत किया गया है। सुल्तानगंज से देवघर तक 500 से अधिक सीसीटीवी और एआई कैमरों के जरिए निगरानी की जा रही है। संवेदनशील स्थानों पर ड्रोन कैमरे भी भीड़ की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं।
बिहार और झारखंड के इस पूरे रूट पर पुलिस, होमगार्ड, आरएएफ और एटीएस की टीमें तैनात हैं। सादे लिबास में महिला और पुरुष पुलिसकर्मी भीड़ के बीच मौजूद हैं, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।
हर कुछ किलोमीटर पर इलाज का इंतजाम
105 किलोमीटर की इस पैदल यात्रा में थकान, चोट या अचानक तबीयत बिगड़ने की स्थिति से निपटने के लिए पूरे मार्ग पर मेडिकल रिलीफ सेंटर बनाए गए हैं। बाइक एंबुलेंस, 108 एंबुलेंस और डॉक्टरों की टीमें तैयार हैं।
सफाई से लेकर पेयजल और शौचालय तक की व्यवस्था लगातार चल रही है। हजारों सफाईकर्मी पूरे रूट को साफ रखने में जुटे हैं।
घाट से बाबा धाम तक एक ही आवाज ‘बम’:
सुल्तानगंज में उत्तरवाहिनी गंगा से जल भरने के बाद कांवरिया जब आगे बढ़ता है तो उसके सामने सिर्फ एक लक्ष्य रहता है बाबा बैद्यनाथ।
रास्ता कठिन है, दूरी लंबी है और मौसम चुनौतीपूर्ण, लेकिन कांवरियों के कदमों में उत्साह कम नहीं। किसी के कंधे पर सजी कांवर है तो किसी के साथ पूरा परिवार। कोई पहली बार निकला है, तो कोई वर्षों से इस यात्रा का हिस्सा बनता आ रहा है।
गंगा से भरा जल कंधे पर है, 105 किलोमीटर का सफर पैरों में है और बाबा धाम पहुंचने की आस दिल में। यही सुल्तानगंज से देवघर तक की सबसे बड़ी तस्वीर है जहां लाखों कदम एक मंजिल की ओर बढ़ रहे हैं और हर कदम के साथ गूंज रहा है… ‘बोल बम!’

















