


@ ट्रक ओनर्स एसोसिएशन ने सरकार से मांगा 5 – 6 घंटे का ‘ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर’, बोला – चालान की मियाद खत्म हुई तो हजारों वाहन मालिकों पर संकट।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। कोआ पुल के क्षतिग्रस्त होने से पहले ही वैकल्पिक रास्तों पर दबाव झेल रहे भारी वाहनों के सामने अब पीरपैंती फोरलेन निर्माण के कारण नया संकट खड़ा हो गया है। भागलपुर जिला ट्रक ओनर्स एसोसिएशन ने पथ निर्माण मंत्री ई शैलेन्द्र को एनटीपीसी में अपनी मांग पत्र देते हुए हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि बिना पूर्व सूचना एनएच 80 स्थित कुआ नाला पुल सड़क बंद किए जाने से हजारों ट्रक जाम में फंस गए और खनिज परिवहन से जुड़े माइनिंग चालान व ई-वे बिल की वैधता समाप्त होने का खतरा पैदा हो गया।
एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष दीपनारायण सिंह ने अपने आवेदन में कहा है कि कोआ पुल बंद रहने के दौरान मिर्जाचौकी से पीरपैंती–शिवनारायणपुर फोरलेन – घोघा – एनएच-80 होते हुए भागलपुर जीरोमाइल तक चल रहा वर्तमान वैकल्पिक मार्ग यथावत रखा जाना चाहिए।
‘सड़क बंद करनी है तो समय बताइए’:
ट्रक मालिकों का कहना है कि फोरलेन निर्माण के लिए सड़क बंद करना जरूरी हो सकता है, लेकिन इसकी पूर्व सूचना परिवहन व्यवसायियों को मिलनी चाहिए। अचानक सड़क बंद होने से कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया। ट्रक चालकों के घंटों फंसे रहने के साथ माल की डिलीवरी प्रभावित हुई और चालान की समय-सीमा को लेकर भी चिंता बढ़ गई।
मुद्दा सिर्फ जाम का नहीं, चालान का भी:
एसोसिएशन ने सबसे बड़ी चिंता झारखंड से जारी माइनिंग चालान की समय-सीमा को लेकर जताई है। संगठन का दावा है कि वैकल्पिक मार्ग में वाहनों को कई स्थानों पर झारखंड क्षेत्र से होकर गुजरना पड़ सकता है। लंबे जाम की स्थिति में चालान की वैधता समाप्त होने पर वाहन मालिकों को आर्थिक और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
आवेदन में एफआईआर, भारी जुर्माना, वाहन जब्ती और नीलामी तक की आशंका जताई गई है। संगठन के अनुसार मिर्जाचौकी से बिहार के करीब 18 जिलों तक प्रतिदिन बड़ी संख्या में गिट्टी और अन्य खनिजों की ढुलाई होती है। ऐसे में मार्ग परिवर्तन का असर केवल कुछ वाहनों तक सीमित नहीं रहेगा।
‘48 घंटे तक लग सकते हैं भागलपुर पहुंचने में’:
एसोसिएशन ने सन्हौला – जगदीशपुर – खिरीबांध टीओपी बाईपास, पीरपैंती – सन्हौला मार्ग और झारखंड के ललमटिया, हनवारा व बोरियो क्षेत्र को पहले से जामग्रस्त बताया है। संगठन का कहना है कि इन रास्तों पर दबाव बढ़ने पर मिर्जाचौकी से भागलपुर पहुंचने में 48 घंटे या उससे अधिक लग सकते हैं।
श्रावणी मेला के दौरान कांवरियों की भीड़ को देखते हुए ट्रक मालिकों ने स्थिति और गंभीर होने की आशंका जताई है।
5–6 घंटे की खिड़की से निकल सकता है रास्ता
ट्रक ओनर्स एसोसिएशन ने टकराव की जगह बीच का रास्ता सुझाया है। मांग है कि निर्माण कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए प्रशासन रोजाना 5–6 घंटे का नियंत्रित समय तय कर दे, जिसमें लोडेड खनिज ट्रकों को सुरक्षित तरीके से गुजरने दिया जाए।
यानी निर्माण भी चलता रहे और मालवाहक वाहनों का पहिया भी पूरी तरह न थमे।
एसोसिएशन ने यह भी मांग की है कि झारखंड की ओर जाने वाले लोडेड ट्रकों को पीरपैंती फोरलेन से नियंत्रित परिचालन की अनुमति दी जाए, ताकि यातायात का दबाव संतुलित रहे।
पुरानी व्यवस्था का भी दिया हवाला
आवेदन में दावा किया गया है कि पूर्व में तत्कालीन जिलाधिकारी सुव्रत सेन के कार्यकाल में भी ऐसी व्यवस्था लागू की गई थी, लेकिन अत्यधिक जाम और झारखंड क्षेत्र में विरोध के कारण वह व्यावहारिक रूप से सफल नहीं हो सकी।
अब ट्रक मालिकों की मांग साफ है—रास्ता पूरी तरह बंद करने के बजाय समयबद्ध नियंत्रित परिचालन की व्यवस्था बनाई जाए।
एसोसिएशन का कहना है कि कोआ पुल बंद रहने की अवधि में परिवहन व्यवस्था को झटके से बदलने के बजाय ऐसा समाधान निकाला जाए, जिसमें निर्माण कार्य, यातायात प्रबंधन और खनिज परिवहन तीनों के हित सुरक्षित रहें।

















