


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। बिहार और झारखंड के बीच रेल संपर्क को नई दिशा देने वाली पीरपैंती-जसीडीह नई रेल लाइन परियोजना अब तेजी से आगे बढ़ रही है। करीब 97 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की लागत 2700 करोड़ रुपये बताई गई है। रेलवे के हालिया आधिकारिक आंकड़ों में भी पीरपैंती-जसीडीह नई लाइन को बिहार में चल रही प्रमुख रेल परियोजनाओं में शामिल किया गया है।
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह महज एक रेल लाइन नहीं, बल्कि भागलपुर क्षेत्र से झारखंड तक कनेक्टिविटी का नया गलियारा तैयार करेगी। परियोजना से यात्रा के साथ-साथ कारोबार, माल ढुलाई और रोजगार के अवसरों को भी गति मिलने की उम्मीद है।
97 किमी का सफर, 38 किमी पर रेल की रफ्तार:
दिए गए परियोजना विवरण के मुताबिक, कुल 97 किमी में 38 किमी रेल लाइन का निर्माण पूरा होकर चालू हो चुका है, जबकि शेष हिस्से पर काम जारी है। आधिकारिक सरकारी परियोजना मॉनिटरिंग रिकॉर्ड में पीरपैंती-जसीडीह नई ब्रॉडगेज लाइन की परियोजना लागत करीब 2555 करोड़ रुपये और पूर्णता लक्ष्य 31 मार्च 2028 दर्ज है।
यानी अलग-अलग समय के सरकारी रिकॉर्ड में परियोजना की लागत के आंकड़ों में बदलाव दिखाई देता है। जुलाई 2026 के PIB अपडेट में इसकी लागत 2700 करोड़ रुपये दर्ज की गई है।
भागलपुर से झारखंड तक बदलेगा रेल नक्शा:
नई लाइन का असर सिर्फ पीरपैंती या जसीडीह तक सीमित नहीं रहेगा। इसके जरिए भागलपुर और झारखंड के बीच वैकल्पिक व बेहतर रेल संपर्क को मजबूती मिलेगी। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार परियोजना बिहार और झारखंड, दोनों राज्यों से संबंधित है और इसका प्रमुख क्षेत्र भागलपुर तथा गोड्डा से जुड़ता है।
इस कॉरिडोर के विकसित होने से – यात्रियों को अधिक सुविधाजनक रेल मार्ग मिलेगा।बिहार-झारखंड के बीच आवागमन आसान होगा।माल ढुलाई और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिल सकता है।नए बाजारों तक पहुंच आसान होने की संभावना है।निर्माण और बाद की आर्थिक गतिविधियों से रोजगार के अवसर बन सकते हैं।

सिर्फ ट्रेन नहीं, बदलेंगे इलाके के अवसर:
रेलवे की नई लाइन किसी क्षेत्र के लिए सिर्फ आने-जाने का साधन नहीं होती। स्टेशन, बाजार, परिवहन और छोटे कारोबार अक्सर रेल कनेक्टिविटी के साथ तेजी से विकसित होते हैं। ऐसे में पीरपैंती-जसीडीह परियोजना के पूरा होने पर भागलपुर, पीरपैंती और झारखंड के जुड़े इलाकों में आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
गौर करने वाली बात यह भी है कि बिहार में रेलवे ने पिछले वर्षों में नई लाइनों और अन्य ट्रैक: परियोजनाओं पर निवेश बढ़ाया है। PIB के जुलाई 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, बिहार से पूरी तरह या आंशिक रूप से जुड़ी 59 रेल परियोजनाएं, कुल 5,067 किमी लंबाई और 96,651 करोड़ रुपये की लागत के साथ स्वीकृत हैं।
भागलपुर के लिए क्यों खास है यह परियोजना:
भागलपुर पहले से ही बिहार के महत्वपूर्ण रेल केंद्रों में शामिल है। इसके आसपास नई रेल लाइन और मौजूदा लाइनों के विस्तार से क्षेत्र की कनेक्टिविटी का नेटवर्क और मजबूत होगा। खासकर बिहार-झारखंड के बीच सीधा संपर्क बढ़ने से यात्रियों के साथ उद्योग और व्यापार को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
38 किमी ट्रैक का चालू होना इस बड़े बदलाव की शुरुआत है। अब निगाहें बाकी हिस्से के निर्माण पर हैं। अगर परियोजना निर्धारित गति से आगे बढ़ती है, तो आने वाले वर्षों में भागलपुर से झारखंड की ओर रेल यात्रा का पूरा परिदृश्य बदल सकता है।
















