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@ मंच के अनुसार, फरवरी माह के पेंशन ग्रांट पर रोक लगाए जाने के छह माह बाद अब अगस्त माह का पेंशन ग्रांट भी रोक दिया गया है। आरोप है कि बार-बार केवल TMBU के पेंशन ग्रांट को ही क्यों रोका जाता है, जबकि वेतन ग्रांट पर ऐसी रोक नहीं लगाई जाती?

प्रदीप विद्रोही

भागलपुर। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) के कुलपति के कार्यकाल का एक वर्ष पूरा होने से पहले ही पेंशनरों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया है। पेंशनर संघर्ष मंच (PSM) ने आरोप लगाया है कि कुलपति ने कार्यभार संभालने के दिन पेंशनरों की समस्याओं के त्वरित समाधान का सार्वजनिक आश्वासन दिया था, लेकिन एक वर्ष बीतने को है और वे आज तक पेंशनरों से एक बार भी मिलने नहीं आए।
मंच के सह-संयोजक अमरेन्द्र झा ने कहा कि 23 अगस्त 2025 को योगदान के दिन कुलपति ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि छात्रों एवं पेंशनरों की समस्या का निराकरण उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी और उनके रहते पेंशनरों को आगे धरने के लिए दरी पर नहीं बैठना पड़ेगा। इसके बावजूद, विश्वविद्यालय के पेंशनरों को अपनी मांगों को लेकर कई बार दरी पर धरना देना पड़ा, लेकिन कुलपति न तो धरना स्थल पर पहुंचे और न ही पेंशनरों के प्रतिनिधिमंडल को मिलने का समय दिया।


पेंशनर संघर्ष मंच ने सबसे गंभीर सवाल वित्त विभाग की कार्यप्रणाली पर उठाया है। मंच के अनुसार, फरवरी माह के पेंशन ग्रांट पर रोक लगाए जाने के छह माह बाद अब अगस्त माह का पेंशन ग्रांट भी रोक दिया गया है। मंच का आरोप है कि बार-बार केवल TMBU के पेंशन ग्रांट को ही क्यों रोका जाता है, जबकि वेतन ग्रांट पर ऐसी रोक नहीं लगाई जाती?
मंच के मुताबिक, जब विश्वविद्यालय प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों से पूछा गया कि वित्त विभाग द्वारा केवल TMBU का पेंशन ग्रांट रोके जाने का कारण क्या है, तो बताया गया कि वित्त विभाग अब तक बिना कारण बताए ही ग्रांट रोकता रहा है।
पेंशनर संघर्ष मंच ने सवाल उठाया कि आखिर बिना कारण बताए एक ही विश्वविद्यालय के पेंशन जैसे महत्वपूर्ण मद की राशि बार-बार रोकने का आधार क्या है? साथ ही मंच ने वित्त, लेखा एवं पेंशन से जुड़े अधिकारियों – FA, Registrar सह DDO, FO तथा संबंधित शाखाओं के कर्मियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं।
मंच का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की कथित उदासीनता से TMBU के 2650 से अधिक पेंशनरों में भारी आक्रोश है। पेंशनर संघर्ष मंच ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि फरवरी और अगस्त माह के लंबित पेंशन भुगतान को सुनिश्चित करने की दिशा में तत्काल ठोस पहल नहीं हुई, तो पेंशनर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन के लिए मजबूर होंगे।
पेंशनर संघर्ष मंच ने कुलपति से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि वे पेंशनरों के शिष्टमंडल से वार्ता करें और फरवरी एवं अगस्त माह के पेंशन भुगतान को सुनिश्चित कराने के लिए प्रभावी पहल करें।
मंच ने चेतावनी दी कि वर्षों की सेवा के बाद अपने पेंशन के लिए बुजुर्ग पेंशनरों को बार-बार दरी पर बैठना पड़े, यह विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। अब आश्वासन नहीं, पेंशनरों को अपने लंबित भुगतान और सम्मानजनक व्यवहार के लिए ठोस कार्रवाई का इंतजार है।

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