


@ भद्रेश्वरनाथ महादेव मंदिर: आस्था, इतिहास और प्रकृति का अद्भुत संगम।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। जिले के कहलगांव अनुमंडल स्थित प्राचीन आस्था, इतिहास और प्राकृतिक सौंदर्य को अपने भीतर समेटे भद्रेश्वरनाथ महादेव मंदिर आज भी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। मान्यता है कि इस प्राचीन मंदिर की स्थापना आठवीं शताब्दी में पाल वंश के शासक धर्मपाल के पौत्र नारायणपाल द्वारा कराई गई थी। लाल मोरंग की दानेदार मिट्टी से भरपूर इस पहाड़ी तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 153 से 157 सीढ़ियों की चढ़ाई-उतराई करनी पड़ती है। यह कठिन यात्रा पूरी कर भगवान शिव के दर्शन करना श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभव बन जाता है। सावन माह और शिवरात्रि के अवसर पर इस मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है। भक्त पूजा-अर्चना और जलाभिषेक करते हैं। श्रद्धालुओं द्वारा भंडारे का भी आयोजन किया जाता है।

एक ही स्थल पर 12 शिवलिंगों का अद्भुत संयोग:
भद्रेश्वरनाथ महादेव मंदिर की सबसे बड़ी विशेषताओं में यहां स्थापित कुल 12 शिवलिंग शामिल हैं। इनमें बाबा भद्रेश्वर के दो शिवलिंग, जबकि अर्द्धनारीश्वर का एक शिवलिंग विशेष धार्मिक महत्व रखता है। इसके अलावा परिसर में अन्य शिवलिंग भी स्थापित हैं। एक ही धार्मिक स्थल पर इतने शिवलिंगों का होना इसे श्रद्धालुओं के बीच विशिष्ट बनाता है।
मंदिर में आने वाले भक्तों का मानना है कि पहाड़ी की सीढ़ियां चढ़ते हुए शिवधाम तक पहुंचना स्वयं में एक साधना के समान है। चढ़ाई के दौरान श्रद्धालुओं को प्रकृति और धार्मिक वातावरण का ऐसा संगम देखने को मिलता है, जो उन्हें आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है।

107 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला धार्मिक क्षेत्र:
भद्रेश्वरनाथ महादेव से जुड़ा क्षेत्र करीब 107 एकड़ 87 डिसमल में फैला बताया जाता है। इसके अतिरिक्त करीब 9 एकड़ 87 डिसमल क्षेत्र का भी उल्लेख किया जाता है। विशाल भू-भाग, पहाड़ी, लाल मोरंग मिट्टी और प्राचीन धार्मिक संरचनाएं इस स्थल को ऐतिहासिक एवं प्राकृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती हैं।
धार्मिक न्याय पार्षद के अनुबंध में अतिप्राचीन मंदिर का उल्लेख:
मंदिर के पुजारी प्रदीप दीक्षित के अनुसार, बिहार राज्य धार्मिक न्याय पार्षद से अनुबंधित दस्तावेज संख्या 4709/2023 में इस मंदिर को अतिप्राचीन मंदिर बताया गया है। इससे मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को लेकर स्थानीय स्तर पर मौजूद दावों को एक महत्वपूर्ण आधार मिलता है।
भू-माफियाओं की नजर से पहाड़ी की खूबसूरती खतरे में:
इतिहास और आस्था की इतनी बड़ी धरोहर होने के बावजूद भद्रेश्वरनाथ महादेव की पहाड़ी आज संरक्षण की चुनौती से जूझ रही है। स्थानीय स्तर पर आरोप है कि भू-माफियाओं द्वारा पहाड़ी को जगह-जगह कुरेदा गया है, जिससे इसके प्राकृतिक स्वरूप और खूबसूरती को नुकसान पहुंच रहा है।लाल मोरंग मिट्टी से बनी पहाड़ी की प्राकृतिक संरचना को छेड़े जाने से न केवल इसका सौंदर्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि आने वाले समय में इसके ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। जिस पहाड़ी पर पहुंचने के लिए श्रद्धालु सीढ़ियां चढ़कर भगवान शिव के दर्शन करते हैं, उसी पहाड़ी का स्वरूप लगातार बिगड़ना चिंता का विषय है।
संरक्षण की दरकार, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी देख सकें विरासत:
भद्रेश्वरनाथ महादेव मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थल नहीं, बल्कि इतिहास, धर्म और प्रकृति की साझा विरासत है। 12 शिवलिंगों की मौजूदगी, आठवीं शताब्दी से जुड़ी स्थापना की मान्यता, विशाल भू-क्षेत्र और प्राकृतिक पहाड़ी इसे विशेष बनाते हैं।
ऐसे में इस धार्मिक-ऐतिहासिक स्थल की जमीन और पहाड़ी का संरक्षण बेहद जरूरी है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की मांग है कि प्रशासन प्राचीन मंदिर क्षेत्र की सीमाओं का संरक्षण करे, पहाड़ी की खुदाई अथवा क्षति की जांच कराए और इसे अतिक्रमण तथा अवैध गतिविधियों से सुरक्षित रखने के लिए ठोस कदम उठाए।
भद्रेश्वरनाथ महादेव की यह पहाड़ी सिर्फ पत्थर और मिट्टी का टीला नहीं, बल्कि सदियों की आस्था और इतिहास की जीवंत पहचान है। जरूरत है कि समय रहते इसे बचाया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी 12 शिवलिंगों वाले इस अद्भुत शिवधाम की आध्यात्मिक और प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव कर सकें।
















