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@ दिल्ली में पप्पू यादव से मुलाकात, पटना में तेजस्वी यादव से भेंट के बाद सियासी गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म; बेटे आशीष मंडल को राजनीतिक मंच देने की कवायद फिलहाल स्थिर।

प्रदीप विद्रोही

भागलपुर। कभी अपने बयानों और विवादित कार्यशैली के लिए चर्चित रहे पूर्व विधायक गोपाल मंडल इन दिनों खूब करवट ले रहे हैं। राजनीति में मौसम का मिजाज कब बदल जाए, यह बताना मुश्किल है। और अगर मामला गोपाल मंडल का हो, तो करवट का इंतजार करने वालों की कमी नहीं।

गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र से लगातार चार बार विधायक रहे नरेंद्र कुमार नीरज उर्फ गोपाल मंडल को लेकर अब चर्चा तेज है कि क्या वे 2029 के लोकसभा चुनाव में भागलपुर सीट से महागठबंधन के संभावित चेहरे के तौर पर मैदान में उतरेंगे?

जेडीयू से छह साल के लिए निष्कासित होने के बाद खुद को ‘फाइटर’ कहने वाले गोपाल मंडल का कभी इस करवट तो कभी उस करवट लेना आखिर में क्या गुल खिलाता है, यह अभी भविष्य के गर्त में है।

इन दिनों उनकी सक्रियता ने इस सवाल को और हवा दे दी है। बताया जा रहा है कि उन्होंने दिल्ली में पूर्णिया सांसद पप्पू यादव से मुलाकात की, वहीं पटना में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से भी भेंट की। बस फिर क्या था – दिल्ली से पटना तक सियासी कैलकुलेटर चालू हो गया और चर्चाओं ने भी रफ्तार पकड़ ली।

गोपाल मंडल के समर्थकों की मानें तो चार बार विधायक रहने का अनुभव, क्षेत्र की राजनीति की गहरी समझ और जनता के बीच पकड़ उन्हें लोकसभा की बड़ी पारी के लिए मजबूत दावेदार बनाती है। दावा यह भी है कि 2029 में भागलपुर की जनता का ‘भरोसा’ संसद में दिखाई देगा और क्षेत्र के समग्र विकास का रास्ता खुलेगा।

लेकिन असली सवाल कुछ और है – गोपाल मंडल किस खेमे में नजर आएंगे:

कभी आरजेडी तो कभी कांग्रेस से जुड़ने की चर्चाओं के बीच सियासी पारा चढ़ता रहा है। अब मुलाकातों की तस्वीरें और राजनीतिक सक्रियता नई अटकलों को जन्म दे रही हैं। हालांकि, 2029 अभी दूर है और टिकट की तस्वीर पर अंतिम मुहर तो वक्त और दलों के नेतृत्व को ही लगानी है।

दिलचस्प बात यह भी कही जा रही है कि पहले बेटे को राजनीति में स्थापित करने की चर्चा थी, लेकिन अब राजनीतिक समीकरणों ने कथित तौर पर पिता की प्राथमिकता बदल दी है। यानी बेटे की राजनीतिक जमीन तैयार करने से पहले खुद के लिए लोकसभा की जमीन नापने की कवायद! फिलहाल, गोपाल मंडल की मुलाकातें राजनीतिक गलियारों में सवाल छोड़ रही हैं – यह सिर्फ शिष्टाचार भेंट है या 2029 की पटकथा का पहला अध्याय।

भागलपुर की राजनीति में अभी फिल्म लंबी है, चुनाव दूर है और टिकट की घोषणा उससे भी दूर। मगर ट्रेलर जरूर चल पड़ा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि 2029 आते-आते गोपाल मंडल किस करवट बैठते हैं – आरजेडी, कांग्रेस या फिर कोई ऐसी राजनीतिक करवट, जिसका अंदाजा अभी किसी को नहीं!

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