


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। भागलपुर और अंग क्षेत्र के लिए रेलवे से आई घोषणाएं महज कुछ नई ट्रेनों या स्टेशनों तक सीमित नहीं हैं। अगर प्रस्तावित परियोजनाएं जमीन पर उतरती हैं, तो आने वाले वर्षों में भागलपुर से देवघर, तारापीठ, दुर्गापुर और रामपुरहाट तक आवाजाही का पूरा नेटवर्क नई शक्ल ले सकता है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ बैठक के बाद सांसद निशिकांत दुबे ने क्षेत्र के लिए कई बड़ी रेल परियोजनाओं की जानकारी दी है।
सबसे खास बात यह है कि धार्मिक पर्यटन और क्षेत्रीय रेल कनेक्टिविटी को एक ही नेटवर्क में जोड़ने की तैयारी दिखाई दे रही है। भागलपुर को देवघर और तारापीठ जैसे प्रमुख धार्मिक केंद्रों से जोड़ने के लिए स्थानीय MEMU/DEMU सेवाओं की योजना है। वहीं देवघर और गोड्डा को दुर्गापुर तथा रामपुरहाट से जोड़ने वाले अतिरिक्त स्थानीय मार्गों की भी योजना बताई गई है।
विक्रमशिला स्टेशन बनेगा नया आकर्षण:
भागलपुर जिले के भवनपुर में स्थित विक्रमशिला स्टेशन को एयरपोर्ट जैसी आधुनिक सुविधाओं वाले विश्वस्तरीय स्टेशन के रूप में विकसित करने की योजना इस पूरी कवायद का अलग आकर्षण है। यह परियोजना आकार लेती है तो विक्रमशिला क्षेत्र के ऐतिहासिक और पर्यटन महत्व को रेलवे नेटवर्क से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
भागलपुर से दिल्ली के लिए स्लीपर वंदे भारत की तैयारी
क्षेत्र के यात्रियों के लिए सबसे बड़ी उम्मीद भागलपुर – आनंद विहार टर्मिनल स्लीपर वंदे भारत एक्सप्रेस को लेकर है। प्रस्ताव पूर्वी रेलवे की रिपोर्ट के बाद रेलवे बोर्ड के अनुमोदन की प्रक्रिया में बताया गया है। मंजूरी मिलने पर यह ट्रेन भागलपुर की दिल्ली कनेक्टिविटी को एक नया आयाम दे सकती है।
तीन बड़ी परियोजनाएं बदलेंगी रेल यातायात
रेलवे के प्रस्तावित निवेश में तीन परियोजनाएं विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं –
भागलपुर – दुमका – रामपुरहाट 177 किमी रेलखंड का दोहरीकरण — ₹3,169 करोड़
भागलपुर – जमालपुर तीसरी रेल लाइन – ₹1,156 करोड़
सबौर – गोनूधाम 13.38 किमी बायपास – ₹303.20 करोड़
इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल नई पटरियां बिछाना नहीं, बल्कि मौजूदा रेल नेटवर्क पर दबाव कम करना और ट्रेनों की आवाजाही को अधिक सुगम बनाना भी है।
पीरपैंती–जसीडीह लाइन से खुलेगा नया रास्ता:

करीब ₹2,700 करोड़ की पीरपैंती – जसीडीह नई रेल लाइन भी क्षेत्र के लिए रणनीतिक महत्व रखती है। इसके अलावा गोड्डा–पाकुड़ रेल लाइन की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति, जसीडीह – चकाई – नवादा रेल लाइन को लेकर सहमति और जसीडीह जंक्शन के बड़े विस्तार की योजनाएं भी प्रस्तावित रेल बदलाव का हिस्सा हैं।
भागलपुर स्टेशन का भी होगा कायाकल्प:
जगदीशपुर में नए स्टेशन के निर्माण और भागलपुर स्टेशन के व्यापक आधुनिकीकरण के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। नए द्वितीयक प्रवेश द्वार समेत स्टेशन के विस्तार की योजनाएं यात्री सुविधाओं और बढ़ती भीड़ के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
श्रावणी मेले ने दिखाया नेटवर्क की क्षमता:
अगस्त 2026 के श्रावणी मेले के दौरान पूर्वी रेलवे ने तिकाणी, धौनी, बाराहाट, मुरहारा, बांका, कटोरिया और चंदन समेत कई स्टेशनों को जोड़ते हुए 16 जोड़ी अनारक्षित विशेष ट्रेनों का संचालन किया। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि धार्मिक पर्यटन के दौरान इस क्षेत्र में रेलवे की मांग कितनी तेजी से बढ़ती है।
कुल मिलाकर, भागलपुर के लिए कहानी सिर्फ नई ट्रेन की नहीं है। दोहरीकरण, तीसरी लाइन, बायपास, नई रेल लाइन, स्टेशन आधुनिकीकरण और स्लीपर वंदे भारत – इन सभी प्रस्तावों को साथ देखें तो अंग क्षेत्र के रेलवे नेटवर्क के पुनर्गठन की तस्वीर सामने आती है। अब असली सवाल घोषणाओं का नहीं, बल्कि इन परियोजनाओं की समयबद्ध मंजूरी और जमीन पर क्रियान्वयन का है।
















