


11 साल के नन्हे बाजीगर ने अंडर-11 में मारी बाजी, तीन प्रतियोगिताओं में उतरे, दो में बने विजेता
भागलपुर : बिसात वही है, 64 खाने वही हैं, राजा-रानी समेत सारे मोहरे भी वही हैं, लेकिन चाल चलने वाला खिलाड़ी नया है और उसके इरादे किसी अनुभवी बाजीगर जैसे हैं। महज छह महीने पहले शतरंज की दुनिया में कदम रखने वाले घोघा (कहलगांव) के 11 वर्षीय अंशुमन अमित ने शुरुआती प्रतियोगिताओं में ही अपनी प्रतिभा का परिचय दे दिया है। कम समय में तीन टूर्नामेंट में हिस्सा लेकर दो में अंडर-11 वर्ग का खिताब अपने नाम करने वाले अंशुमन ने संकेत दे दिया है कि उनकी नजर सिर्फ अगली चाल पर नहीं, बल्कि पूरी बाजी पर है।

कहते हैं कि शतरंज में उम्र नहीं, चाल बोलती है। अंशुमन की बिसात पर फिलहाल उनकी चालों की आवाज साफ सुनाई दे रही है। महज छह महीने के अभ्यास में उन्होंने जिस तरह प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन किया है, उससे परिवार और आसपास के लोगों में उनके उज्ज्वल भविष्य को लेकर उत्साह है।
घोघा निवासी अमित उपाध्याय और अर्चना उपाध्याय के पुत्र अंशुमन के लिए शतरंज केवल खेल नहीं, बल्कि सोच, धैर्य और रणनीति को परखने का माध्यम बनता जा रहा है। परिवार में दादा गोपाल उपाध्याय तथा मामा कुंज पाठक और कृष्ण पाठक उन्हें शतरंज की बारीकियां समझाते हैं। मोहरों की चाल, उनकी ताकत और सही समय पर सही मोहरा चलने की रणनीति का अभ्यास भी वह परिवार के सदस्यों के साथ करते हैं।

पढ़ाई के साथ शतरंज में बढ़ाया कदम
अंशुमन की शुरुआती पढ़ाई चेन्नई के एनटीपीसी क्षेत्र स्थित लिटिल फ्लावर प्ले स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने सेंट जोसेफ स्कूल, कहलगांव से चौथी कक्षा तक पढ़ाई की। वर्तमान में वह गुरुकृपा किड्स कॉलेज, कहलगांव में कक्षा छह के छात्र हैं।
शतरंज की बिसात पर अंशुमन की कहानी भले ही अभी महज छह महीने पुरानी है, लेकिन इन छह महीनों में उनके खेल में आत्मविश्वास तेजी से बढ़ा है। परिवार के मुताबिक, वह खेल की शुरुआत में बिना सोचे-समझे मोहरों को आगे बढ़ाने के बजाय पहले पूरी बिसात को समझने और ओपनिंग तैयार करने पर ध्यान देते हैं।
पहली ही प्रतियोगिताओं में दिखाया दम
अंशुमन ने अगस्त में डीएवी पब्लिक स्कूल, एनटीपीसी में आयोजित जिला स्तरीय प्रतियोगिता में अंडर-11 वर्ग में प्रथम स्थान हासिल किया। इसके बाद 23 अगस्त को आयोजित प्रतियोगिता में भी उन्होंने अपनी खेल क्षमता का प्रदर्शन किया। तीसरी प्रतियोगिता भागलपुर के मारवाड़ी कॉलेज में आयोजित हुई, जहां अंडर-11 वर्ग में अंशुमन ने एक बार फिर प्रथम स्थान हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
मारवाड़ी कॉलेज में आयोजित प्रतियोगिता के दौरान कॉलेज के प्राचार्य, विधायक रोहित पांडेय सहित अन्य अतिथि भी मौजूद रहे। लगातार प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन से अंशुमन के आत्मविश्वास में भी इजाफा हुआ है।
तीन मोहरों से बनाते हैं दबाव
अंशुमन के खेल की सबसे खास बात उनके दादा गोपाल उपाध्याय बताते हैं। उनके अनुसार, अंशुमन किसी एक मोहरे पर निर्भर रहने के बजाय कई मोहरों की ताकत को एक साथ इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं।
गोपाल उपाध्याय बताते हैं, “वह बिसात पर हर मोहरे को जोड़कर चलता है। राजा पर हमला करने के लिए एक साथ तीन मोहरों की ताकत लगाता है। यही उसकी खास खूबी है।”
शतरंज की भाषा में देखें तो यह रणनीति केवल आक्रमण करने की नहीं, बल्कि मोहरों के बीच तालमेल बनाकर प्रतिद्वंद्वी पर लगातार दबाव तैयार करने की है। अंशुमन पहले प्रतिद्वंद्वी की बिसात को कमजोर करने की कोशिश करते हैं और फिर मौके के अनुसार हमला तेज करते हैं।
लंबी बाजी की यह अभी शुरुआत
महज छह महीने पहले जिस बच्चे ने शतरंज की बिसात पर पहली चाल चली थी, वह अब प्रतियोगिताओं में जीत की बाजियां खेलने लगा है। तीन प्रतियोगिताओं में भाग लेकर दो में प्रथम स्थान हासिल करना उसके शुरुआती सफर की मजबूत शुरुआत है।
परिवार को उम्मीद है कि नियमित अभ्यास, बेहतर प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं में लगातार भागीदारी के साथ अंशुमन जिला स्तर से आगे बढ़कर राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाएंगे।
















