


सधुआ चापर, मदरौनी और सहोड़ा में सड़ रही फसल, मच्छरों के बढ़ते प्रकोप से ग्रामीण परेशान
नवगछिया। कोसी नदी का पानी घटने के बाद रंगरा प्रखंड के बाढ़ प्रभावित सधुआ चापर, मदरौनी और सहोड़ा गांवों में लोगों की परेशानी कम होने के बजाय बढ़ गई है। बाढ़ का पानी उतरने के बाद गांवों और आसपास के इलाकों में जगह-जगह मोटी परत में कीचड़ जमा है। वहीं, खेतों में कई दिनों तक पानी में डूबी रहने के कारण फसल सड़ने लगी है। सड़ी फसल और जमा कीचड़ से निकल रही तेज दुर्गंध के कारण आसपास के क्षेत्र में लोगों का रहना मुश्किल हो रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार, कई दिनों तक पानी में डूबी रहने के कारण खेतों में लगी फसल खराब होकर सड़ गई है। पानी उतरने के बाद सड़ी फसल और कीचड़ से निकलने वाली दुर्गंध दूर तक फैल रही है। घरों और आसपास के रास्तों पर भी कीचड़ जमा रहने से लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है। शाम होते ही मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। इससे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को विशेष परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के दौरान लंबे समय तक पानी और कठिन परिस्थितियों के बीच रहने के बाद पानी घटने पर उन्हें राहत की उम्मीद थी, लेकिन अब सड़ांध, कीचड़ और मच्छरों ने नई परेशानी खड़ी कर दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रभावित इलाकों में अब तक पर्याप्त सफाई नहीं कराई गई है। मच्छरों से बचाव के लिए दवा का छिड़काव भी नहीं कराया गया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावित गांवों में तत्काल सफाई अभियान चलाने, सड़ी फसल और कचरा हटाने, चूना एवं ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराने तथा मच्छररोधी दवा का नियमित छिड़काव कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते सफाई और संक्रमणरोधी उपाय नहीं किए गए तो बाढ़ के बाद जमा गंदगी के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

बाढ़ के कारण पहले ही घर, फसल और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हुई है। अब पानी घटने के बाद पैदा हुई गंदगी और दुर्गंध ने ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावित इलाकों का निरीक्षण कर तत्काल राहत और स्वच्छता की व्यवस्था कराने की मांग की है।
















