


भागलपुर। कोसी और गंगा के बढ़े जलस्तर से नवगछिया के रंगरा प्रखंड अंतर्गत सधुवा और चापर गांव के किसानों की परेशानी बढ़ गई है। बाढ़ का पानी गांव के आसपास के बड़े भू-भाग में फैल गया है, जिससे खेतों में लगी फसलें पानी में डूब गई हैं। किसानों के अनुसार, सैकड़ों एकड़ में लगी फसल बर्बाद होने की स्थिति में पहुंच गई है।

खेतों में लंबे समय से पानी जमा रहने के कारण कई जगहों पर फसल पूरी तरह जलमग्न है। तैयार होती फसल के बाढ़ में डूबने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान की आशंका है। किसानों का कहना है कि फसल तैयार करने में बीज, खाद, मजदूरी और सिंचाई सहित अन्य मदों में बड़ी राशि खर्च की गई थी, लेकिन बाढ़ के पानी ने उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया।
किसानों के सामने आर्थिक संकट
किसानों के अनुसार, खेती ही उनके परिवार की आय का मुख्य साधन है। फसल से होने वाली आमदनी से परिवार का खर्च चलाने के साथ खेती के लिए लिया गया कर्ज भी चुकाना था। अब फसल बर्बाद होने की स्थिति में कर्ज चुकाने और परिवार का खर्च चलाने को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि पानी उतरने के बाद भी तत्काल खेती शुरू करना आसान नहीं होगा। खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से मिट्टी और कृषि कार्य प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में आगामी फसल की तैयारी के लिए किसानों को अतिरिक्त आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता पड़ सकती है।
सर्वे और मुआवजे की मांग
बाढ़ प्रभावित किसानों ने प्रशासन से सधुवा और चापर गांव के खेतों का तत्काल सर्वे कराने तथा फसल क्षति का आकलन करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि वास्तविक नुकसान का आकलन कर सरकारी प्रावधान के अनुसार सहायता और मुआवजा उपलब्ध कराया जाए, ताकि बाढ़ से हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई में उन्हें राहत मिल सके।
सधुवा और चापर के किसानों के लिए बाढ़ का पानी केवल खेतों में जमा पानी नहीं है, बल्कि यह उनकी महीनों की मेहनत, खेती में लगी पूंजी और आने वाले दिनों की आय पर पड़ा गंभीर संकट है। अब किसानों की नजर प्रशासन की ओर है कि फसल क्षति का आकलन कब शुरू होता है और प्रभावित किसानों तक राहत किस प्रकार पहुंचती है।
















