
@ कठिनाइयों और चुनौतियों के बावजूद तीन दिवसीय गांधी उत्सव रहा प्रभावशाली।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। दिशा ग्रामीण विकास मंच, बैजानी द्वारा आयोजित तीन दिवसीय 12वें गांधी उत्सव का रविवार को सांस्कृतिक कार्यक्रम, कवि सम्मेलन और संकल्प सभा के साथ शानदार समापन हुआ। गांधी जयंती तथा गांधीजी के भागलपुर-बांका आगमन के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित इस उत्सव की शुरुआत जहां सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुई, वहीं इसका समापन गांधी के विचारों, भारतीय संविधान और सामाजिक समरसता के प्रति संकल्प के साथ हुआ।

समापन कार्यक्रम का उद्घाटन बापू टावर, पटना के उप निदेशक ललित कुमार सिंह, संजय ठाकुर, वरिष्ठ अंगिका साहित्यकार डॉ. अमरेंद्र, वरिष्ठ पत्रकार प्रसून लतांत तथा संस्था के सचिव डॉ. मनोज मीता और अध्यक्ष प्रो. मनोज कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
कार्यक्रम की शुरुआत संस्था द्वारा आयोजित मंजूषा कला प्रदर्शनी के अवलोकन से हुई। इसके बाद विभिन्न संस्थाओं और स्थानीय कलाकारों ने नृत्य, गीत, वादन और एकल नाटक की प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत गांधीजी के प्रिय भजन ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ के गायन से हुई, जिसकी प्रस्तुति कृपालजी ने की। इसके बाद मंजूषा गुरु मनोज पंडित के समूह ने कथक नृत्य, झिझिया नृत्य और गीत प्रस्तुत किए। किलकारी, भागलपुर के बच्चों ने सितार वादन की मनमोहक प्रस्तुति दी। स्थानीय बच्चों की प्रस्तुति समवेत के कलाकारों ने दी। रंग ग्राम के सुनील ने हरिशंकर परसाई के चर्चित व्यंग्य पर आधारित ‘मैं नरक से बोल रहा हूं’ एकल नाटक प्रस्तुत किया।
गांधी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाना जरूरी : ललित कुमार सिंह
मुख्य अतिथि बापू टावर, पटना के उप निदेशक ललित कुमार सिंह ने कहा कि सुदूर गांव में गांधी के नाम पर इस तरह का व्यापक आयोजन होना उनके लिए आश्चर्य और प्रसन्नता का विषय है। उन्होंने कहा, ‘मैं यहां आकर अभिभूत हूं। बापू टावर आप जैसी संस्थाओं को सहयोग करने के लिए तत्पर है।’

उन्होंने कहा कि आज गांधी पर उंगली उठाना एक तरह से आम फैशन बन गया है, लेकिन उस आलोचना के जवाब में गांधी के विचारों को समाज के सामने रखने वाले लोग कम दिखाई देते हैं। ऐसे समय में दिशा ग्रामीण विकास मंच का यह आयोजन आश्वस्त करता है कि गांधी को आम जन तक पहुंचाने और उनके बारे में फैलाए जा रहे भ्रम को दूर करने का कार्य लगातार किया जा रहा है।
उन्होंने कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शामिल अति पिछड़े और दलित समुदाय के बच्चों का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इन बच्चों को बचपन से ही गांधी की सादगी, सत्य और नैतिकता से परिचित कराया जा रहा है। उन्होंने इसके लिए संस्था को साधुवाद दिया।
कार्यक्रम के दौरान संस्था के सचिव डॉ. मनोज मीता ने ललित कुमार सिंह को भागलपुरी चादर, सर्वोदय झोला तथा अंगिका में अनूदित पुस्तक ‘महात्मा गांधी की आत्मकथा’ भेंट की। इसके प्रत्युत्तर में बापू टावर की ओर से डॉ. मनोज मीता को शॉल एवं चादर देकर सम्मानित किया गया।
श्री संजय ठाकुर ने कहा कि गांधी को समझने के लिए गांवों में आना जरूरी है और दिशा ग्रामीण विकास मंच यह काम लगातार कर रहा है। उन्होंने संस्था के प्रयासों की सराहना की।
इस अवसर पर अजय आलोक, टिंकू यादव, लखनलाल पाठक, सुनीला अग्रवाल, डॉ. सुधीर मंडल तथा नंद किशोर पंडित ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
कवि सम्मेलन ने बांधा समां:
उत्सव के दौरान आयोजित कवि सम्मेलन ने भी माहौल को साहित्यिक रंग दिया। युवा कवि शेखर खागड़ी की अध्यक्षता में आयोजित कवि सम्मेलन का संचालन कवि राजकुमार ने किया। उलूपी झा, मृदुला सिंह, विकास सिंह ‘गुलटी’, धीरज पंडित, प्रकाश सेन ‘प्रीतम’ तथा साकेत कुमार ध्रुव ने अपनी कविताओं का पाठ किया।
दीप प्रज्वलन और संविधान की प्रस्तावना की शपथ के साथ समापन
तीन दिवसीय गांधी उत्सव का समापन शाम 5:17 बजे गांधी प्रतिमा के समक्ष आयोजित संकल्प सभा के साथ हुआ। उपस्थित जनसमूह ने हाथों में दीप प्रज्वलित कर भारतीय संविधान की प्रस्तावना की शपथ ली। इसके बाद गांधीजी की प्रतिमा के समक्ष दीपदान करते हुए सत्य, अहिंसा, सद्भाव, सामाजिक समरसता और संविधान के मूल्यों के प्रति अपने संकल्प को दोहराया।कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों की उपस्थिति रही। इस अवसर पर शिवशंकर पांडेय, त्रिभुवन कुमार, अमर्त्य, सिद्धार्थ, विकास, गोविंद अग्रवाल, प्रदीप, राजू, डॉ. जयंत, विक्रम, बरसा, मनीष, नंदिता सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
तीन दिनों तक चले गांधी उत्सव के आयोजन में संस्था को अनेक कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद संस्था के कार्यकर्ताओं, कलाकारों, बच्चों, अतिथियों और स्थानीय लोगों के सामूहिक सहयोग से उत्सव शानदार ढंग से संपन्न हुआ। गांधी के विचारों, लोककला, संस्कृति, साहित्य और संविधान के मूल्यों को एक साथ जोड़ने वाला यह आयोजन न केवल सफल रहा, बल्कि सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में गांधी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रेरक पहल के रूप में सामने आया।















