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@ एचआरएमएस पोर्टल पर फर्जी आईडी बनाकर वेतन और एरियर भुगतान का आरोप, डीएम के निर्देश पर चार सदस्यीय जांच समिति गठित।

प्रदीप विद्रोही

भागलपुर। बिहार के भागलपुर शिक्षा विभाग में फर्जी शिक्षिका के नाम पर सरकारी राशि के भुगतान का मामला सामने आया है। ‘तनुश्री’ नाम की एक कथित शिक्षिका की पहचान एचआरएमएस पोर्टल पर दर्ज कर मई 2025 से वेतन भुगतान किए जाने का आरोप है। मामले में करीब 98 लाख रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की बात सामने आई है। जोगसर थाने में छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर अविनाश राज को हिरासत में लिया है, जबकि जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) शशि चंद चौधरी से भी पूछताछ किए जाने की जानकारी है।

स्कूल में शिक्षिका नहीं, सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज थी पहचान:

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, ‘तनुश्री’ नाम की शिक्षिका की कथित फर्जी पहचान तैयार कर एचआरएमएस पोर्टल पर आईडी बनाई गई। इसी पहचान के आधार पर वेतन और एरियर के नाम पर सरकारी राशि के भुगतान का आरोप है। इस पूरे मामले में फर्जी पीआरएएन नंबर और बैंक खाते के इस्तेमाल की आशंका भी जताई जा रही है।अब जांच का प्रमुख बिंदु यह है कि कथित फर्जी आईडी किस स्तर पर बनाई गई और उसके आधार पर वेतन भुगतान की प्रक्रिया कैसे शुरू हुई। साथ ही, दस्तावेजों के सत्यापन और भुगतान की मंजूरी में किन अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका रही, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।

वित्तीय लेनदेन की राशि को लेकर अलग-अलग आंकड़े:

मामले में सामने आई प्रारंभिक जानकारियों के मुताबिक, मई 2025 से जुलाई 2026 के बीच करीब 52 लाख रुपये की कथित निकासी का उल्लेख है। वहीं, अगस्त 2026 में एक खाते में लगभग 43 से 46 लाख रुपये के बड़े लेनदेन और कुल संदिग्ध वित्तीय अनियमितता की राशि करीब 96 से 98 लाख रुपये होने की बात कही जा रही है।
इसके अलावा, करीब 73 लाख रुपये के एक कथित ट्रांसफर प्रयास को बैंक की ओर से रोके जाने का दावा भी सामने आया है। हालांकि, अलग-अलग विवरणों में रकम और लेनदेन की तारीखों को लेकर अंतर है। ऐसे में वास्तविक निकासी, खाते में जमा राशि, रोके गए ट्रांसफर और कुल संदिग्ध रकम का सही आंकड़ा बैंक स्टेटमेंट, विभागीय रिकॉर्ड और पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

खाता फ्रीज होने के बाद लेनदेन की जांच तेज:

प्रकरण से जुड़ी जानकारी के अनुसार, एक खाते में बड़ी रकम पहुंचने के बाद बैंक की ओर से उसे फ्रीज किए जाने की बात सामने आई है। एक अन्य बड़े ट्रांसफर प्रयास को रोके जाने का भी दावा किया गया है। जांच में अब यह पता लगाने की कोशिश होगी कि संदिग्ध खाते में पहुंची राशि कहां गई, क्या रकम दूसरे खातों में भी भेजी गई और संबंधित खातों का संचालन कौन कर रहा था। इसके लिए बैंकिंग लेनदेन, एचआरएमएस पोर्टल के डिजिटल रिकॉर्ड, लॉगिन विवरण, भुगतान की मंजूरी और विभागीय दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण होगी।

डीएम के निर्देश पर चार सदस्यीय जांच समिति गठित:

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है। उप विकास आयुक्त रवि कुमार के अनुसार, समिति शिक्षा कार्यालय में उपलब्ध अभिलेखों और एचआरएमएस पोर्टल के डेटा की जांच कर रही है। लेनदेन से संबंधित रिकॉर्ड का भी परीक्षण किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
भागलपुर प्रमंडल के क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक सुभाष गुप्ता ने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। उनके अनुसार, एक शिक्षिका के नाम पर फर्जी आईडी बनाकर वेतन के नाम पर अवैध निकासी किए जाने का आरोप है। उन्होंने कहा कि एक ऑपरेटर की भूमिका संदिग्ध है और अब मामले की जांच पुलिस कर रही है।

पुलिस कर रही पूछताछ:

एसडीपीओ हेमंत सिंह के अनुसार, मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और नामजद लोगों से पूछताछ की जाएगी। उन्होंने करीब 98 लाख रुपये के लेनदेन का मामला होने की जानकारी दी। कुछ लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। पूछताछ के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की जांच की जाएगी।

जांच में इन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे:

इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि कथित फर्जी पहचान तैयार करने से लेकर सरकारी राशि के भुगतान तक की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई। क्या दस्तावेजों का सही तरीके से सत्यापन किया गया था? एचआरएमएस पोर्टल पर आईडी किसने बनाई और किसके लॉगिन से भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ी? भुगतान को मंजूरी देने वाले स्तर पर क्या जांच हुई थी? इन सवालों के जवाब डिजिटल साक्ष्य, बैंक रिकॉर्ड और विभागीय अभिलेखों की जांच से मिलने की उम्मीद है।

फिलहाल, छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने और कंप्यूटर ऑपरेटर को हिरासत में लिए जाने के बाद मामले की जांच जारी है। किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता और कथित वित्तीय अनियमितता की वास्तविक राशि का अंतिम निर्धारण जांच तथा कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।

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