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का आरोप; चार मछुआरों की डंडों से जमकर पिटाई

@ 2018 में इसी धार में हुई थी मछुआरे बलराम सहनी की निर्मम हत्या।

प्रदीप विद्रोही

भागलपुर। गंगा की मुख्य धारा में पानी लौटने के साथ ही मछुआरे मछली पकड़ने निकलने लगे हैं। इसी बीच जिले के कहलगांव स्थित गंगा पार मतरोजा धार में मछुआरों के साथ मारपीट और रंगदारी मांगने का मामला सामने आया है। कागजी टोला के मछुआरों ने सोनुवा यादव गैंग के सदस्यों पर मारपीट करने और मछली पकड़ने के एवज में रंगदारी मांगने का आरोप लगाया है। पीड़ितों के मुताबिक, रविवार को चार मछुआरों के साथ मारपीट की गई।

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जल श्रमिक संघ के प्रांतीय संयोजक सह वार्ड पार्षद योगेंद्र सहनी ने बताया कि इन दिनों सोनुवा गैंग का आतंक गंगा की धार में बढ़ गया है। घटना के बाद गंगा मुक्ति आंदोलन के केंद्रीय कार्यालय, कहलगांव में उनके नेतृत्व में जल श्रमिक संघ की आपात बैठक हुई। इसमें बड़ी संख्या में मछुआरे शामिल हुए और घटना की निंदा की। बैठक में भागलपुर और नवगछिया के पुलिस कप्तानों से आरोपित अपराधियों पर लगाम लगाने तथा मछुआरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई।

देसी कट्टे के बल पर घेरने और डंडों से पीटने का आरोप:

घायल मछुआरों संजय सहनी (40), ज्ञान सहनी (50), मुकेश सहनी (35) और पिंटू सहनी (40) ने बताया कि बाढ़ के कारण वे तीन महीने से मछली पकड़ने नहीं जा रहे थे। गंगा की धारा लौटने पर रविवार की अहले सुबह वे मतरोजा धार पहुंचे। आरोप है कि वहां सोनुवा यादव गैंग के सदस्यों ने देसी कट्टे के बल पर उन्हें घेर लिया और उनकी नाव समेत उन्हें अपने कब्जे में ले लिया। मछुआरों के अनुसार, चार लोगों ने फाइबर के डंडों से उनकी पिटाई की और मछली पकड़ने के लिए रंगदारी देने को कहा। इस दौरान ज्ञान सहनी का मोबाइल छीनने और अन्य मोबाइल फोन बंद कराने का भी आरोप है। पीड़ितों ने बताया कि करीब तीन घंटे तक अपने कब्जे में रखने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया।

दोपहर में तीन अन्य मछुआरों को पकड़ने का प्रयास, गोली चलाने का आरोप:

पीड़ितों ने बताया कि रविवार दोपहर करीब एक बजे उसी धार में डेंगी पर सवार होकर जाल बिछा रहे चंदन, बुद्धू और विश्वनाथ सहनी को भी उक्त गैंग ने अपने कब्जे में लेने का प्रयास किया। आरोप है कि उन्हें रोकने के लिए गोलियां चलाई गईं और रुकने की हिदायत दी गई। हालांकि, तीनों वहां से भागने में सफल रहे।
मछलियों की प्रचुरता के कारण पहुंचते हैं मछुआरे:

मतरोजा धार में इन दिनों बचवा, टेंगड़ा, बुआड़ी, सुगवा, कलभोंस और रीठा जैसी मछलियां प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। इसी वजह से कागजी टोला सहित आसपास के इलाकों के मछुआरे देर रात डेंगी लेकर यहां पहुंचते हैं। मछली पकड़ना उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है।
गौरतलब है कि वर्ष 2018 में इसी धार में जलदस्युओं ने मछुआरे बलराम सहनी की निर्मम हत्या कर दी थी। ऐसे में ताजा घटना में मारपीट और रंगदारी मांगने के आरोपों ने मछुआरों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। मामले में आरोपों की पुष्टि और घटना की पूरी स्थिति पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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