
@ सबौर में 32वीं अनुसंधान परिषद की दो दिवसीय बैठक शुरू, जलवायु-अनुकूल खेती, AI, बीज संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष जोर।
भागलपुर। बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में वासंतिक – रबी 2026 – 27 की 32वीं अनुसंधान परिषद की दो दिवसीय बैठक का शुभारंभ हुआ। कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में कृषि अनुसंधान को प्रयोगशालाओं से निकालकर किसानों के खेतों तक पहुँचाने और बदलती जलवायु की चुनौतियों के बीच खेती को अधिक टिकाऊ एवं लाभकारी बनाने पर विशेष चर्चा हुई। विश्वविद्यालय में लगभग 600 अनुसंधान परियोजनाओं पर काम जारी है। बैठक में इन शोध प्रयासों को किसानों की वास्तविक जरूरतों, कृषि उत्पादकता, आय वृद्धि और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों से जोड़ने की दिशा में विचार-विमर्श किया गया।
खेती को नई दिशा देने वाले विषयों पर फोकस:

बैठक में जलवायु-स्मार्ट कृषि, फसल विविधीकरण, मृदा स्वास्थ्य में सुधार और पारंपरिक बीज किस्मों के संरक्षण को प्रमुखता दी गई। इसके साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग तथा किसान-केंद्रित वैज्ञानिक नवाचारों को बढ़ावा देने पर बल दिया गया। उद्देश्य है कि कृषि अनुसंधान का लाभ किसानों तक व्यावहारिक रूप में पहुँचे और खेती की बदलती चुनौतियों का प्रभावी समाधान मिल सके।
अनुसंधान से उद्यमिता और रोजगार तक की पहल:
कृषि उत्पादों को विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए भौगोलिक संकेतक (GI) पंजीकरण की दिशा में पहल पर भी चर्चा हुई। वहीं, अनुसंधान को कृषि व्यवसाय, स्टार्टअप और रोजगार सृजन से जोड़ने की आवश्यकता रेखांकित की गई। टिकाऊ कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के साथ किसानों की आय में वृद्धि और संसाधनों के बेहतर उपयोग को भी महत्वपूर्ण लक्ष्य बताया गया।
वैज्ञानिक प्रकाशनों का हुआ विमोचन:

उद्घाटन सत्र के दौरान कृषि अनुसंधान, मृदा स्वास्थ्य, बीज संरक्षण, कृषि व्यवसाय और वैज्ञानिक उपलब्धियों से संबंधित महत्वपूर्ण पुस्तकों एवं प्रकाशनों का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. देवेंद्र सिंह और बिहार कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व निदेशक अनुसंधान डॉ. ए. पी. सिंह सहित प्रगतिशील किसानों, वैज्ञानिकों एवं विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने अपने विचार रखे।वक्ताओं ने कृषि अनुसंधान की गुणवत्ता, उपयोगिता और उसके जमीनी प्रभाव को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। चर्चा का प्रमुख उद्देश्य वैज्ञानिक उपलब्धियों को किसानों की जरूरतों के अनुरूप उपयोगी तकनीकों में बदलना रहा। दो दिवसीय यह अनुसंधान परिषद बैठक बिहार में कृषि के भविष्य को लेकर नए विचारों और वैज्ञानिक प्राथमिकताओं पर मंथन का मंच बनी है।















