
@ बिहार के अंशु सोरेन और साजन कुमार का नेशनल इंक्लूसिव चिल्ड्रेन पार्लियामेंट के लिए चयन, राष्ट्रीय मंच पर करेंगे राज्य का प्रतिनिधित्व।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। प्रतिभा किसी बड़े शहर या संपन्न परिवार की मोहताज नहीं होती, जरूरत होती है तो बस सही अवसर और मार्गदर्शन की। इस बात को सच साबित करते हुए भागलपुर जिले के दो बच्चे अब राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाने जा रहे हैं। सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था समवेत से जुड़े अंशु कुमारी सोरेन और साजन कुमार का चयन नई दिल्ली में आयोजित होने वाले नेशनल इंक्लूसिव चिल्ड्रेन पार्लियामेंट के लिए किया गया है। दोनों बच्चे इस आयोजन में बिहार का प्रतिनिधित्व करेंगे।
Pratyek संस्था की ओर से 14 से 20 नवंबर तक आयोजित होने वाले इस सात दिवसीय कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों के बच्चे एक मंच पर जुटेंगे। यहां बाल अधिकार, शिक्षा, समानता और बच्चों की निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर कार्यशालाएं, परिचर्चाएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अंशु और साजन 12 नवंबर को दिल्ली के लिए रवाना होंगे।

दोनों बच्चों की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि इनका सफर उन सामाजिक परिस्थितियों से निकलकर राष्ट्रीय मंच तक पहुंचा है, जहां परिवारों की आजीविका ईंट-भट्ठों पर मजदूरी, खेतों में काम और घरेलू श्रम पर निर्भर है। सन्हौला प्रखंड के गोकुलपुर गांव स्थित सिद्धू-कान्हू प्रेरणा केंद्र की 14 वर्षीय अंशु कुमारी सोरेन और घोघा के फुलकिया स्थित दशरथ मांझी ई-एजुकेशन सेंटर के साजन कुमार ने अपने आत्मविश्वास और प्रतिभा के दम पर यह मुकाम हासिल किया है।
समवेत के प्रेरणा केंद्र और ई-एजुकेशन सेंटर से जुड़कर इन बच्चों को शिक्षा के साथ अपनी प्रतिभा निखारने, सामाजिक मुद्दों को समझने और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर मिला। अब वे राष्ट्रीय मंच पर अपने अनुभवों और विचारों को साझा करेंगे। उनकी भागीदारी उन बच्चों के लिए भी प्रेरणा बनेगी, जिन्हें सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के कारण आगे बढ़ने के अवसर कम मिल पाते हैं।
दिल्ली जाने वाली टीम का नेतृत्व समवेत के सुनील कुमार मंडल और नीतू मुर्मू करेंगी। कार्यक्रम के समन्वय और बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित करने में संस्था के निदेशक विक्रम की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। समवेत लंबे समय से शिक्षा, कला-संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से वंचित समुदायों के बच्चों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और अधिकारों के प्रति समझ विकसित करने के लिए काम कर रही है। संस्था का मानना है कि हर बच्चे को अपनी बात रखने और समाज के निर्माण में भागीदारी का समान अवसर मिलना चाहिए।

अंशु और साजन का राष्ट्रीय मंच तक पहुंचना केवल दो बच्चों की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उन समुदायों की आवाज को पहचान मिलने का अवसर भी है, जिनकी बातें अक्सर बड़े मंचों तक नहीं पहुंच पातीं। उनकी इस उपलब्धि पर बाल अधिकारों के लिए कार्यरत विभिन्न संस्थाओं और संगठनों ने बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।















