
@ कच्ची कांवरिया पथ पर अनोखी कांवर यात्रा बनी आकर्षण का केंद्र, मनोरंज कुमार के हौसले और भक्ति को देख राहगीर भी रह गए दंग।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। कैलेंडर के पन्नों से सावन भले ही विदा हो जाए, लेकिन शिवभक्तों के दिलों में भोलेनाथ के प्रति आस्था का सावन कभी समाप्त नहीं होता। भादो हो या कार्तिक, बाबा भोलेनाथ के जयकारे हर महीने गूंजते रहते हैं। इसी अटूट आस्था की एक ऐसी तस्वीर सुल्तानगंज के कच्ची कांवरिया पथ पर देखने को मिली, जिसने लोगों को हैरत में डाल दिया है। कोई पैदल चलता है, कोई दंडवत यात्रा करता है, लेकिन बांका के एक शिवभक्त ने बाबा के दरबार तक पहुंचने के लिए ऐसा रास्ता चुना है, जिसकी चर्चा अब हर जुबान पर है।

बांका जिले के खड़ौदा निवासी मनोरंज कुमार इन दिनों अपनी अनोखी कांवर यात्रा को लेकर सुर्खियों में हैं। सुल्तानगंज की उत्तरवाहिनी गंगा से जल उठाकर वह करीब 105 किलोमीटर की दूरी गुलाटी मारते हुए बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचने के संकल्प के साथ निकल पड़े हैं। उनकी इसी अनोखी भक्ति ने उन्हें लोगों के बीच ‘गुलाटी बम’ के रूप में पहचान दिला दी है।
सुल्तानगंज के कच्ची कांवरिया पथ पर जब मनोरंज कुमार एक के बाद एक गुलाटी मारते हुए आगे बढ़ते हैं, तो राह चलते लोग ठिठककर उन्हें देखने लगते हैं। कोई मोबाइल में इस अनोखे नजारे को कैद करता है, तो कोई उनके हौसले को सलाम करता है। उनके साथ बिहार ड्राइवर महासंघ के सदस्य भी चल रहे हैं
और इस कठिन यात्रा में उनका उत्साह बढ़ा रहे हैं।
मनोरंज कुमार की इस अनूठी यात्रा के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है। उनका कहना है कि भगवान भोलेनाथ की कृपा से उनके जीवन में किसी चीज की कमी नहीं है। असम स्थित मां कामाख्या मंदिर की यात्रा के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं को पहाड़ी रास्तों पर गुलाटी मारते हुए मंदिर तक जाते देखा था। श्रद्धालुओं की उस अनोखी भक्ति ने उनके मन पर गहरी छाप छोड़ी। तभी उनके मन में भी अपने आराध्य के प्रति इसी तरह समर्पण जताने का विचार आया।
















