
प्रदीप विद्रोही
@ पिछले वर्ष नवंबर तक 150-170 से अधिक प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों का झुंड पहुंचा था, छह महीने तक रहता है इनका प्रवास।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। जिले के गंगा व कोसी नदी के कछार समेत विभिन्न जलाशयों में मध्य अक्टूबर से मध्य मार्च तक 170 से अधिक प्रजातियों के विदेशी पक्षी प्रवास करते हैं। अक्टूबर बीत जाने के बावजूद अब तक महज 30 से 35 प्रजातियों के प्रवासी पक्षी ही दिखाई दे रहे हैं। जबकि बीते वर्ष इस समय तक 150 से अधिक प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों के झुंड जिले के नवगछिया अनुमंडल के घटोरा, जगतपुर, विक्रमशिला गंगेटिक डॉल्फिन सेंचुरी और कोसी नदी के आसपास पहुंच चुके थे। वर्तमान में विदेशों से आने वाले वैसे पक्षी दिखाई दे रहे हैं, जो नदी किनारे रहते हैं।

पक्षी विशेषज्ञों का मानना है कि दूसरे देशों में अभी बर्फबारी का सिलसिला शुरू नहीं हुआ है। वहीं, भारत के उत्तरी मैदानी इलाकों में तापमान अधिक रहने के कारण प्रवासी पक्षी अब तक नहीं आए हैं। अलनीनो के प्रभाव से इस समय पूरी दुनिया का तापमान सामान्य से अधिक है। इस असामान्य मौसमी स्थिति का असर पशु-पक्षियों के रहन-सहन पर भी दिखने लगा है। जगतपुर, घटोरा और गंगा प्रसाद जैसे जलाशयों के साथ ही गंगा-कोसी के कछार में भी पक्षियों की संख्या कम दिखाई दे रही है। पिछले वर्ष इस माह तक 150 से अधिक प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों के झुंड पहुंच चुके थे। इन पक्षियों का प्रवास यहां आगामी छह महीने तक रहता है।
इस समय जिले के जलाशयों के आसपास कॉमन ग्रीनशैंक और ब्लैक-विंग्ड स्टिल्ट जैसे प्रवासी पक्षी दिखाई दे रहे हैं। वहीं, शिकारी पक्षियों (रैप्टर) में पेरेग्रीन फाल्कन, रेड-नेक्ड फाल्कन और कॉमन केस्ट्रेल जैसे पक्षी जिले के आसमान में मंडरा रहे हैं। नवंबर के अंत तक प्रवासी पक्षियों के आने का सिलसिला जारी रहने की उम्मीद है।
















