


सबौर, भागलपुर। भविष्य की नौकरियों की तैयारी अब केवल डिग्री से नहीं, बल्कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), कौशल और नवाचार से होगी। इसी संदेश के साथ सबौर महाविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के छह वर्ष पूरे होने पर आयोजित व्याख्यानमाला और विशेषज्ञ गोष्ठी में शिक्षा के बदलते स्वरूप पर गंभीर मंथन हुआ। वक्ताओं ने माना कि आने वाले समय में एआई केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि हर क्षेत्र की अनिवार्य आवश्यकता बनने जा रही है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) संजय कुमार झा ने कहा कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल डिग्रीधारी बनाना नहीं, बल्कि उन्हें रोजगार, उद्यमिता और कौशल से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि यदि भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनना है, तो शिक्षा व्यवस्था को तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना होगा।
मुख्य वक्ता डॉ. आभा कुमारी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता की तुलना मानव जीवन में श्वास से करते हुए कहा कि जिस तरह जीवन के लिए सांस आवश्यक है, उसी प्रकार भविष्य की शिक्षा, उद्योग, चिकित्सा, कृषि और प्रशासन में एआई की भूमिका अनिवार्य होगी। उन्होंने छात्र-छात्राओं, विशेषकर छात्राओं, से नई तकनीकों को सीखने और डिजिटल कौशल विकसित करने का आह्वान किया। उनका विश्वास था कि भारत विश्व का प्रमुख एआई केंद्र बनने की क्षमता रखता है।
विशिष्ट वक्ता प्रो. (डॉ.) आशुतोष कुमार दत्ता ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शामिल स्किल एन्हांसमेंट, एबिलिटी एन्हांसमेंट और वैल्यू एडेड पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को रोजगार के लिए बेहतर ढंग से तैयार करेंगे। उनके अनुसार यह नीति शिक्षा व्यवस्था में दूरगामी परिवर्तन लाने वाली साबित होगी।
डॉ. कुमार मनोज ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा, जब बिहार जैसे राज्यों में शिक्षा और कौशल विकास को नई गति मिलेगी। वहीं हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश रंजन ने नई शिक्षा नीति को बेरोजगारी कम करने और विकसित भारत की आधारशिला बताया।
महाविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. मयंक वत्स ने कहा कि नई शिक्षा नीति केवल पाठ्यक्रम का बदलाव नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान-परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का प्रयास है। उन्होंने नालंदा, तक्षशिला और विक्रमशिला की गौरवशाली विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह नीति अनुसंधान, नवाचार और आत्मनिर्भरता के माध्यम से भारत को फिर से वैश्विक ज्ञान नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ा सकती है।
कार्यक्रम में शिक्षकों, कर्मचारियों और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की भागीदारी रही। इसी अवसर पर समाजशास्त्र एवं इतिहास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में छात्राओं के लिए मेहंदी प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली प्रतिभागियों को सम्मानित करने की घोषणा की गई।
दूसरे सत्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञ गोष्ठी आयोजित हुई, जिसमें शिक्षकों ने नीति के व्यावहारिक क्रियान्वयन, कौशल-आधारित शिक्षा और तकनीकी बदलावों पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मयंक वत्स ने किया तथा राष्ट्रगान के साथ इसका समापन हुआ।
सबौर महाविद्यालय का यह आयोजन केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि भविष्य की शिक्षा वही होगी, जिसमें परंपरा और तकनीक दोनों साथ-साथ चलें।
















