


वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. केके चौधरी को ‘बिहार आयुर्वेद रत्न’ सम्मान से किया गया सम्मानित
पूर्णिया। आकाशवाणी रोड स्थित सहयोग प्रांगण में बुधवार को आयुर्वेद दिवस के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सहयोग के अध्यक्ष एवं आयुष चिकित्सक डॉ. अजीत प्रसाद सिंह के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में भगवान धन्वंतरि के तैलचित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया गया। इस दौरान लोगों को आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के महत्व और उपयोगिता के प्रति जागरूक किया गया।

कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. केके चौधरी को सहयोग की ओर से ‘बिहार आयुर्वेद रत्न’ सम्मान से सम्मानित किया गया। उन्हें प्रशस्ति-पत्र एवं अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सहयोग अध्यक्ष एवं आयुष चिकित्सक डॉ. अजीत प्रसाद सिंह ने कहा कि आयुर्वेद प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति के साथ जीवन जीने की एक समग्र पद्धति है। इसका उद्देश्य स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना और रोगी के रोगों का उपचार करना है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद में शरीर और जीवनशैली के संतुलन पर विशेष जोर दिया जाता है।
उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में प्राकृतिक औषधियों, जड़ी-बूटियों और अन्य पारंपरिक उपचार पद्धतियों का उपयोग किया जाता है। आयुर्वेद में वात, पित्त और कफ जैसे त्रिदोषों के संतुलन को स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार, योग, ध्यान और नियमित दिनचर्या के माध्यम से शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने पर भी आयुर्वेद में जोर दिया जाता है।
वहीं वरिष्ठ आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. केके चौधरी ने कहा कि आयुर्वेद केवल बीमारी के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि समग्र स्वास्थ्य और संतुलित जीवनशैली पर भी केंद्रित है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद में खान-पान, दिनचर्या, मानसिक स्वास्थ्य और शरीर के संतुलन को महत्वपूर्ण माना जाता है।

उन्होंने आयुर्वेद में आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान और साक्ष्य आधारित अध्ययन के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद को वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ आगे बढ़ाते हुए दैनिक स्वास्थ्य देखभाल का हिस्सा बनाने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के दौरान लोगों को आयुर्वेदिक चिकित्सा और जड़ी-बूटियों के उपयोग की जानकारी दी गई। जरूरतमंद रोगियों का आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति और जड़ी-बूटियों के माध्यम से उपचार भी किया गया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग के सदस्य एवं आयुष चिकित्सक डॉ. राजेश गोस्वामी, डॉ. प्रीतम कुमार, डॉ. सतीश ठाकुर, डॉ. रूपेश गांधी, डॉ. रंजीत रमन, डॉ. इमदाद आलम, डॉ. संजय, हरदेव शर्मा, कुमार राजीव कुमार, अनुपम कुमार और राजा कुमार सहित अन्य सदस्यों का सराहनीय सहयोग रहा।
















