


@ राहत शिविरों में कला बनी सहारा, बच्चों ने कागज पर उकेरी कल्पनाएं; मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देखा मंजूषा कला का हुनर
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। भीषण बाढ़ की विभीषिका के बीच राहत शिविरों में जिंदगी को फिर से सामान्य बनाने की कोशिश जारी है। इसी कोशिश में अब मंजूषा कला के रंग उम्मीद और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश दे रहे हैं। भागलपुर जिला प्रशासन की ओर से संचालित विभिन्न बाढ़ राहत शिविरों में प्रभावित परिवारों को आश्रय, भोजन और जरूरी सुविधाएं देने के साथ उनके मानसिक संबल और रचनात्मक अभिव्यक्ति का भी ख्याल रखा जा रहा है।

इसी क्रम में जिला कला एवं संस्कृति कार्यालय की ओर से राहत शिविरों में प्रतिदिन मंजूषा कला प्रशिक्षण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इन गतिविधियों को आर्ट थेरेपी के माध्यम के रूप में संचालित किया जा रहा है, ताकि आपदा की कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे बच्चों और परिवारों को तनाव से राहत के साथ एक सकारात्मक एवं रचनात्मक माहौल मिल सके।
रंगों और रेखाओं में बच्चों ने तलाशा अपना संसार
मंजूषा कला कार्यशाला में बाढ़ प्रभावित बच्चों को अंग क्षेत्र की पारंपरिक लोक कला, बिहुला-विषहरी की लोकगाथा और मंजूषा चित्रकला की विविध विशेषताओं से परिचित कराया जा रहा है। बच्चे रंगों और रेखाओं के माध्यम से अपनी कल्पनाओं को कागज पर उतार रहे हैं।
राहत शिविरों में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम भी बच्चों और परिवारों के बीच उत्साह का माहौल बना रहे हैं। गीत, संगीत और अन्य कलात्मक प्रस्तुतियों के जरिए आपदा की कठिन घड़ी में लोगों को कुछ पल सुकून और खुशी के मिल रहे हैं।
कला ने बदला शिविर का माहौल
अंग क्षेत्र की अपनी पारंपरिक कला से जुड़ने का असर राहत शिविरों में साफ दिखाई दे रहा है। कठिन परिस्थितियों के बीच मंजूषा कला बच्चों को अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने और तनाव से उबरने का सहज माध्यम उपलब्ध करा रही है। रंगों से जुड़ते बच्चे न सिर्फ अपनी कल्पनाओं को आकार दे रहे हैं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी परिचित हो रहे हैं।

















