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@ महिला नेत्री ने कथित टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर श्लोक से पलटवार किया। अखिल भारतीय गंगोत्री महासभा से जुड़े लोगों ने भी मंत्री के बयान की भर्त्सना की है।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। गंगा पार के इलाकों में बाढ़ का पानी भले उतरने लगा हो, लेकिन सियासत का पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। पथ निर्माण मंत्री ई. कुमार शैलेन्द्र के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में दिए गए कथित बयान को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता दिख रहा है। सभा में कथित तौर पर महिला नेत्री को लेकर ’61 हजार वाली कहां गई?’ जैसी टिप्पणी किए जाने के बाद महागठबंधन से जुड़े नेताओं ने मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कुछ गंगोत्री नेताओं ने इस बयान के खिलाफ संगठित होकर अगले विधान सभा चुनाव में जवाब देने की बात कही है।
मामला तब और गरमा गया, जब संबंधित महिला नेत्री ने सीधे राजनीतिक बयानबाजी के बजाय सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर संस्कृत के एक श्लोक के जरिए जवाब दिया। उन्होंने लिखा – ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।’ इसके साथ उन्होंने नारी सम्मान और स्त्री के अपमान के ऐतिहासिक परिणामों का उल्लेख किया।


‘61 हजार वाली’ पर सियासी बवाल:
सभा में कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए ’61 हजार वाली कहां गई?’ शब्द अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गए हैं। विपक्षी नेताओं का दावा है कि यह टिप्पणी पिछले विधानसभा चुनाव में मंत्री के प्रतिद्वंद्वी रहे राजनीतिक चेहरे की ओर इशारा करती है। उनके मुताबिक, संबंधित उम्मीदवार को 61,433 मत प्राप्त हुए थे और इसी संदर्भ में यह कथित टिप्पणी की गई। हालांकि, मंत्री के बयान का वास्तविक आशय और संदर्भ राजनीतिक दलों की अलग-अलग व्याख्याओं का विषय बना हुआ है।
राजद नेता का पलटवार – ‘यह सामंती सोच का परिचायक’:
आरजेडी के पूर्व प्रधान महासचिव संजय मंडल सहित दर्जनों महागठबंधन व आरजेडी नेता चेतन शर्मा, पुष्पराज, कृष्णकांत, प्रणव, ऋषि, गोपाल, अमित साहू, बिंदेश्वरी मंडल, आजाद अंसारी, संदीप कुमार ने सोशल मीडिया पर हल्ला बोलते हुए मंत्री के कथित बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अतिपिछड़ा समाज की महिला उम्मीदवार के संदर्भ में इस तरह की भाषा का इस्तेमाल आपत्तिजनक है। मंडल ने यह भी दावा किया कि स्थानीय कार्यकर्ताओं को लेकर भी मंत्री की ओर से कथित रूप से ‘दलाल’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने इसे मंत्री की कथित ‘सामंती सोच’ से जोड़ते हुए कहा कि महागठबंधन को मिले वोट को वे लालू प्रसाद यादव और राजद के कार्यों से जोड़कर देखते हैं।
जहां तक महागठबंधन को 61000 (एक सठ हजार) वोट आने की बात है तो बता देता हु ये नवगछिया को पुलिस जिला बनाने का वोट है, खरीक, नारायणपुर प्रखंड बनाने का वोट है। खरीक में कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय का वोट है। रेलवे लाइन का विद्युतीकरण और दोहरीकरण का वोट है और आज जिस गंगा और कोशी कटाव की राजनीत कर रहे उसका सच ये है की काजी कोरिया से तीनटंगा तक जो गंगा का बांध और कोशी नदी का रिंग बांध बना है वो भी राष्ट्रीय जनता दल की सरकार की बनाई हुई है। आपकी सरकार ने क्या किया। उस बांध को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा कर दी और 20 वर्षों में उसका सुरक्षा नहीं कर सकी। क्या मंत्री बताएंगे की 20 वर्षों की सरकार में चोरहर, मैरचा, सिंहकुंड, को बचा पाए सिर्फ कटाव पर राजनीत कर रहे है और संबंधित विभाग का प्रवक्ता बनने के लिय होर लगाए हुए है।और मैं बता दूं मंत्री ई शैलेंद्र जी जब से बिहपुर की राजनीति में आए है तब से ये अतिपिछड़ा विरोधी रहे है
‘चेत जाइए, वरना…’ ने बढ़ाई सियासी बेचैनी:
विवाद सिर्फ महिला नेत्री को लेकर कथित टिप्पणी तक सीमित नहीं है। सार्वजनिक सभा में सांसद को लेकर कथित तौर पर ‘चेत जाइए, वरना…’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल की चर्चा भी राजनीतिक गलियारों में तेज है। फिलहाल मंत्री के कथित बयान को लेकर सियासी घमासान जारी है।

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