


@ कहलगांव निवासी कुमार रंजन मुंबई में बैंक अधिकारी, लेकिन पहचान बन रही प्रकृति के संवेदनशील फोटोग्राफर के रूप में, कैमरे से नहीं, नजरिए से रचते हैं यादगार तस्वीरें।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। दिन में बैंक की जिम्मेदारियां और फुर्सत के हर पल में प्रकृति की तलाश। यह कहानी है जिले के बहलगांव निवासी कुमार रंजन की, जिनके लिए फोटोग्राफी महज शौक नहीं, बल्कि जीवन को देखने का एक नजरिया है। बैंक अधिकारी के रूप में मुंबई में कार्यरत रंजन का कैमरा पेड़ों की डालियों पर चहकती चिड़ियों, बादलों की बदलती आकृतियों, जलक्रीड़ा करते पक्षियों और जंगल की अनकही दुनिया को ऐसे कैद करता है कि हर तस्वीर अपने आप में एक कहानी बन जाती है।
पलक के झपकते ही इनका मिररलेस डीएसएल आर कैमरा ( निकॉन) सामने से गुजरते हश्य, प्रकृति का खुशनुमा नजारा, आसमान में उमड़ते-घुमड़ते बादल, टहनियों में फुन्दकती चिड़ियां-चुनमुन, झाड़ी, टहनी के पीछे व जलक्रीड़ा में लीन पशु-पक्षी को कैद कर लेता है। रंजन कहते हैं मेरा यह शौक बचपन से मुझमें शुमार था। छोटी सी उम्र से ही प्रकृति से प्यार रहा है। पेड़-पौधे, पक्षी सब कुछ मुझे अपनी ओर खींचते रहे है। रंजन लंबे समय से अपने इस शौक से आमजन को रूबरू करा रहे हैं।
अपने सोशल मीडिया हैंडल मेटा (फेसबुक) और इंस्टाग्राम पर उनकी ली हुई सैकड़ों तस्वीरें उपलब्ध हैं। रंजन आगे कहते हैं पहले याशिका के छोटे से प्वाइंट एंड शूट कैमरे से फोटो लेता था। धीरे-धीर रील बाले कैमरे की जगह मिररलेस कैमरे और लेंस ने ले ली।
रंजन बताते हैं कि प्रकृति के प्रति उनका लगाव बचपन से रहा है। पहले याशिका के छोटे पॉइंट-एंड-शूट कैमरे से तस्वीरें लेते थे, लेकिन समय के साथ तकनीक बदली और आज मिररलेस कैमरा उनकी रचनात्मक अभिव्यक्ति का सबसे भरोसेमंद साथी बन चुका है। नौकरी के सिलसिले में देश के अलग-अलग शहरों में पोस्टिंग मिली, मगर कैमरा कभी उनसे दूर नहीं हुआ। आधिकारिक यात्राओं में भी कैमरा उनके बैग का स्थायी हिस्सा रहता है।

उनकी फोटोग्राफी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे किसी दृश्य को केवल रिकॉर्ड नहीं करते, बल्कि उसमें छिपी भावना और जीवंतता को सामने लाते हैं। उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रकृति और वन्यजीवों की ऐसी अनेक तस्वीरें हैं, जो दर्शकों को कुछ पल ठहरकर सोचने पर मजबूर कर देती हैं।
कम लोग जानते हैं कि रंजन केवल फोटोग्राफर ही नहीं, बल्कि एक उम्दा कार्टूनिस्ट और शतरंज खिलाड़ी भी रहे हैं। अंतरविश्वविद्यालय स्तर पर शतरंज में प्रतिनिधित्व कर चुके रंजन के कार्टून भी विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। वे अपनी इस बहुआयामी प्रतिभा का श्रेय अपने बड़े भाइयों संजीव और अंजन को देते हैं, जिन्हें वे अपनी प्रेरणा मानते हैं।
रंजन का मानना है कि अच्छी फोटोग्राफी महंगे कैमरे से नहीं, बल्कि संवेदनशील नजर और धैर्य से जन्म लेती है। उनके अनुसार किसी भी तस्वीर की सफलता छह बातों पर निर्भर करती है—सही प्रकाश, संतुलित कंपोजीशन, स्पष्ट फोकस, अलग एंगल, प्राकृतिक रंग और सबसे बढ़कर तस्वीर में छिपी कहानी।
वे नए फोटोग्राफरों को सलाह देते हैं कि कैमरे की तकनीकी जानकारी जितनी जरूरी है, उतना ही जरूरी पर्यावरण के प्रति संवेदनशील होना भी है। लगातार अभ्यास, धैर्य और सीखने की ललक ही किसी साधारण शौक को असाधारण कला में बदल सकती है।
रंजन कहते हैं, ‘फोटोग्राफी केवल तस्वीरें लेना नहीं है, बल्कि किसी पल की आत्मा को हमेशा के लिए सहेज लेना है। कैमरा सिर्फ एक उपकरण है, असली तस्वीर तो फोटोग्राफर की नजर और संवेदनशीलता बनाती है।’
यही सोच कुमार रंजन को हजारों कैमरों की भीड़ में अलग पहचान देती है। उनकी तस्वीरें केवल दृश्य नहीं दिखातीं, बल्कि प्रकृति की निस्सीम सुंदरता और उसके मौन संदेश को भी दर्शकों तक पहुंचाती हैं।
















