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भागलपुर में बीती रात आए भीषण आंधी-तूफान और तेज बारिश ने जहां जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया, वहीं बड़ी संख्या में पक्षियों की भी मौत हो गई। तेज हवाओं, बारिश और पेड़ों के गिरने से कई पक्षी इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में आ गए।

जानकारी के अनुसार भागलपुर के झौवाकोठी और खिरनीघाट इलाके में ही कई दर्जन पक्षियों के मृत पाए जाने की सूचना है। मृत पक्षियों में एशियन कोयल, गंगा मैना, बैंक मैना सहित मैना प्रजाति के कई पक्षी शामिल हैं। स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यह आंकड़ा केवल दो इलाकों का है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि पूरे जिले में इस आंधी-तूफान के कारण कितने पक्षियों की जान गई होगी।

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि पक्षियों की मौत केवल जैव विविधता के लिए ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संतुलन के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है। पक्षी प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे कीट नियंत्रण, बीजों के प्रसार और पर्यावरण संरक्षण में अहम योगदान देते हैं।

स्थानीय लोगों ने बताया कि तेज तूफान के दौरान कई पेड़ उखड़ गए और पक्षियों के घोंसले नष्ट हो गए। कई पक्षी तेज हवाओं की चपेट में आकर जमीन पर गिर पड़े, जबकि कई पेड़ों के नीचे दब गए।

शिक्षक सह पर्यावरण सुरक्षा संरक्षक कंचन कुमारी ने कहा कि इस तरह की घटनाएं पर्यावरण के लिए गंभीर संकेत हैं। उन्होंने लोगों से पक्षियों और पेड़ों के संरक्षण के प्रति जागरूक होने की अपील की। साथ ही प्रशासन और वन विभाग से प्रभावित क्षेत्रों में पक्षियों के संरक्षण और बचाव के लिए विशेष अभियान चलाने की मांग की।

तेज आंधी और बारिश से हुई इस तबाही ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि प्राकृतिक आपदाओं का असर केवल इंसानों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पशु-पक्षियों और पूरे पर्यावरण पर भी गहरा प्रभाव डालता है।

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