


नशे की लत बन रही चोरी की बड़ी वजह
@ पिछले वर्ष दो दर्जन से भी अधिक घरों और बिजली पोल के बीच झूलते तांबे के तार को चोरों द्वारा काटने की घटना हो चुकी है।

प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। कहलगांव शहर और आसपास के इलाकों में एक बार फिर बिजली के तांबे के तार चुराने वाला गिरोह सक्रिय हो गया है। लगातार सामने आ रही घटनाओं ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। चोर खासकर उन घरों को निशाना बना रहे हैं, जहां रात के समय लोग गहरी नींद में सोए रहते हैं। गिरोह बिजली के पोल से घर तक आने वाले तांबे के तार काटकर फरार हो जाता है, जिससे पीड़ित परिवारों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ घंटों बिजली बाधित रहने की परेशानी भी झेलनी पड़ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले वर्ष भी कहलगांव में दर्जनों घरों से बिजली के तार चोरी होने की घटनाएं हुई थीं। इसके बावजूद इस तरह की घटनाओं पर पूरी तरह रोक नहीं लग सकी है। लगातार हो रही चोरी की वारदातों के बाद पुलिस की रात्रि गश्ती व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का मानना है कि यदि रात में प्रभावी गश्ती हो तो इस तरह के गिरोहों पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है।
ताजा घटना में जदयू नेता राजीव कुमार सिन्हा के घर को निशाना बनाया गया। बीती रात चोरों ने बिजली के पोल से उनके घर तक लगे तांबे के तार काट लिए। सुबह जब बिजली आपूर्ति बाधित हुई तब चोरी की जानकारी मिली। घटना के बाद आसपास के लोगों में भी दहशत का माहौल है और कई परिवार अपने घरों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार इस गिरोह में नशे के आदी युवकों की संलिप्तता होने की आशंका जताई जा रही है। बताया जाता है कि चोरी किए गए तांबे के तार कबाड़ी दुकानों में बेच दिए जाते हैं और उससे मिलने वाली रकम का उपयोग नशा खरीदने में किया जाता है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि पुलिस द्वारा नहीं की गई है और मामले की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
कहलगांव और आसपास के क्षेत्रों में सूखे नशे का अवैध कारोबार लंबे समय से चिंता का विषय बना हुआ है। पुलिस द्वारा समय-समय पर कार्रवाई और कई कारोबारियों व पैडलरों की गिरफ्तारी के बावजूद यह कारोबार पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ गांवों में अब भी नशीले पदार्थों की आपूर्ति जारी है, जिसके कारण युवाओं में नशे की लत बढ़ रही है और चोरी जैसी घटनाओं को बढ़ावा मिल रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि नशे की गिरफ्त में आए कई युवक अपने परिवार की जमा-पूंजी, घरेलू सामान और कीमती वस्तुएं तक बेच चुके हैं। कुछ वर्ष पहले शहर के राजघाट क्षेत्र में एक युवक द्वारा बहन की शादी के लिए रखे गए लाखों रुपये के गहने चोरी कर बेचने की घटना भी काफी चर्चा में रही थी। इस घटना ने नशे के दुष्प्रभाव को उजागर किया था।
हालांकि कुछ गांवों में ग्रामीणों की एकजुटता का सकारात्मक असर भी देखने को मिला है। सैतपुर कुलकुलिया गांव के लोगों ने संगठित विरोध कर अपने इलाके में अवैध नशे के कारोबार पर काफी हद तक रोक लगाने में सफलता हासिल की। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि ओगरी, महेशामुंडा और बनसप्ती समेत कुछ अन्य क्षेत्रों में अब भी अवैध कारोबारियों की गतिविधियां जारी हैं।
लगातार हो रही बिजली तार चोरी की घटनाओं और नशे के बढ़ते प्रभाव ने प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है। स्थानीय नागरिकों ने पुलिस प्रशासन से रात्रि गश्त बढ़ाने, कबाड़ी दुकानों की नियमित जांच करने तथा नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ व्यापक अभियान चलाने की मांग की है। लोगों का मानना है कि पुलिस, प्रशासन और समाज के संयुक्त प्रयास से ही इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा।
















