


जल संसाधन विभाग, प्रशासनिक अधिकारियों और ग्रामीणों के संयुक्त प्रयास से देर रात शुरू हुआ बचाव कार्य शुक्रवार दोपहर सफल; गोपालपुर व रंगरा के कई गांवों और फसलों पर मंडरा रहा था खतरा

गोपालपुर। प्रखंड मुख्यालय के पीछे स्थित ब्रह्मोत्तर तटबंध पर देर रात तेज आंधी और बारिश के बीच पानी के तेज थपेड़ों से अचानक करीब 20 मीटर लंबा कटाव हो गया। तटबंध पर गंगा और कोसी के पानी का दबाव बना हुआ है। हालांकि जलस्तर में लगातार कमी आ रही थी, लेकिन अचानक हुई तेज बारिश और हवा के बीच पानी के दबाव ने तटबंध के एक हिस्से को कमजोर कर दिया। कटाव की सूचना मिलते ही इलाके में अफरातफरी की स्थिति बन गई और आसपास के ग्रामीणों में भी चिंता बढ़ गई।
तटबंध के कटने की सूचना मिलते ही जल संसाधन विभाग की टीम के साथ प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय ग्रामीण देर रात से ही बचाव कार्य में जुट गए। अंधेरे और प्रतिकूल मौसम के बावजूद तटबंध को बचाने के लिए लगातार प्रयास किया गया। विभागीय कर्मियों और ग्रामीणों ने मिलकर कटाव वाले हिस्से को नियंत्रित करने के लिए टीन, बालू से भरे बोरे और एनसी आदि का इस्तेमाल किया।
लगातार करीब 15 घंटे तक चले बचाव कार्य के बाद शुक्रवार दोपहर कटाव स्थल पर पानी के तेज बहाव को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया गया। इसके बाद तटबंध के क्षतिग्रस्त हिस्से को सुरक्षित करने और उसे और मजबूत बनाने का काम जारी रखा गया। मौके पर मौजूद अधिकारियों और ग्रामीणों की लगातार निगरानी से स्थिति को नियंत्रण में रखने में मदद मिली।
समय रहते संभाला मोर्चा, कई गांवों पर टला खतरा
ब्रह्मोत्तर तटबंध पर कटाव बढ़ने की स्थिति में गोपालपुर प्रखंड के कई गांवों के साथ-साथ खेतों में लगी फसलों के प्रभावित होने की आशंका थी। तटबंध के समीप सैदपुर, गोपालपुर, लतरा और धरहरा गांवों के ग्रामीणों में भी चिंता बढ़ गई थी। खेतों में पपीता, मिर्च सहित अन्य फसलें लगी हैं। ग्रामीणों के अनुसार यदि पानी का बहाव नियंत्रित नहीं किया जाता तो खेतों में लगी फसलों को व्यापक नुकसान हो सकता था।
कटाव की स्थिति गंभीर होने पर रंगरा प्रखंड के भी कई गांव प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी। हालांकि जल संसाधन विभाग, प्रशासन और ग्रामीणों के संयुक्त प्रयास से समय रहते कटाव स्थल पर बचाव कार्य शुरू कर दिया गया, जिससे पानी के बहाव को नियंत्रित करने में सफलता मिली।
रातभर चलता रहा बचाव कार्य
कटाव की सूचना के बाद रात से ही अधिकारी और ग्रामीण मौके पर मौजूद रहे। तेज हवा और बारिश के बीच तटबंध को सुरक्षित करने के लिए लगातार बालू से भरे बोरे लगाए गए। क्षतिग्रस्त हिस्से में पानी के बहाव को रोकने और दबाव कम करने के लिए टीन तथा अन्य उपलब्ध सामग्री का भी इस्तेमाल किया गया।
ग्रामीण सह हाईकोर्ट अधिवक्ता मुकेश कुमार ने बताया कि तटबंध की स्थिति की जानकारी मिलते ही जल संसाधन विभाग, प्रशासनिक पदाधिकारी और ग्रामीण बचाव कार्य में जुट गए। उन्होंने कहा कि करीब 15 घंटे तक लगातार प्रयास किया गया, जिसके बाद कटाव वाले हिस्से में पानी के बहाव को लगभग नियंत्रित कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने भी विभागीय टीम के साथ मिलकर तटबंध की सुरक्षा में पूरा सहयोग किया।
अधिकारियों ने मौके पर रहकर संभाली स्थिति
बचाव कार्य के दौरान गोपालपुर के अंचलाधिकारी रोशन कुमार, बीडीओ समेत संबंधित पदाधिकारी मौके पर मौजूद रहे और स्थिति की निगरानी करते रहे। अधिकारियों ने जल संसाधन विभाग की टीम के साथ कटाव स्थल का जायजा लिया तथा आवश्यकतानुसार बचाव कार्य को आगे बढ़ाया।
पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि जितेंद्र कुमार गौतम उर्फ गुड्डू मुखिया, भाजपा के वरिष्ठ नेता नितेंद्र सिंह उर्फ गुलाबी, अमर कुमार, गुलशन कुमार, आदित्य कुमार, सरूण मंडल, पंकज कुमार सिंह, अधिवक्ता मुकेश कुमार समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण भी रात से ही मौके पर मौजूद रहे। ग्रामीणों ने बालू से भरे बोरे लगाने और अन्य बचाव कार्यों में विभागीय टीम का सहयोग किया।
तटबंध की लगातार निगरानी जरूरी
ब्रह्मोत्तर तटबंध पर कटाव को नियंत्रित किए जाने के बावजूद ग्रामीणों और प्रशासन की चिंता पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। गंगा और कोसी के पानी का दबाव तटबंध पर बना रहने के कारण संवेदनशील हिस्से की लगातार निगरानी जरूरी बताई जा रही है। प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीम को कटाव वाले हिस्से पर नजर बनाए रखने के साथ आवश्यकतानुसार अतिरिक्त सुरक्षात्मक कार्य करने की जरूरत है।
ग्रामीणों का कहना है कि तटबंध की स्थायी सुरक्षा के लिए क्षतिग्रस्त हिस्से की मजबूती से मरम्मत आवश्यक है, ताकि दोबारा पानी का दबाव बढ़ने पर ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो। फिलहाल शुक्रवार दोपहर तक पानी के बहाव को नियंत्रित कर लिए जाने से सैदपुर, गोपालपुर, लतरा और धरहरा सहित आसपास के गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली है। तटबंध की सुरक्षा को लेकर प्रशासन और ग्रामीणों की निगरानी जारी है।















