


ब्रह्माकुमारीज़ पूर्णिया शाखा में आयोजित कार्यक्रम में दादी जी के जीवन, आध्यात्मिक सेवा और विश्व शांति के संदेश को किया गया याद

पूर्णिया। प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज़ ईश्वरीय विश्व विद्यालय, पूर्णिया शाखा के सभागार में संचालिका बी.के. मुकुटमणि जी के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय माउंट आबू, राजस्थान की पूर्व मुख्य प्रशासिका दादी प्रकाशमणि जी की 19वीं पुण्य स्मृति को ‘विश्व बंधुत्व दिवस’ के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर दादी प्रकाशमणि जी के जीवन, आध्यात्मिक योगदान और विश्व शांति के लिए किए गए कार्यों को याद किया गया।
कार्यक्रम में बी.के. मुकुट दीदी ने दादी प्रकाशमणि जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दादी प्रकाशमणि जी का जन्म 2 सितंबर 1922 को हैदराबाद, सिंध (अब पाकिस्तान) में हुआ था। उनका बचपन का नाम रमा था। मात्र 14 वर्ष की उम्र में वर्ष 1936 में, जब प्रजापिता ब्रह्मा बाबा ने ओम मंडली की स्थापना की, तब वे इससे जुड़ गईं। उन्होंने आध्यात्मिक उन्नति, समाज निर्माण और मानवीय मूल्यों के उत्थान के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।

दादी प्रकाशमणि जी का व्यक्तित्व अत्यंत शांत, सरल, मधुर और मातृत्व भाव से परिपूर्ण था। वे सभी से स्नेहपूर्वक मिलती थीं, जिसके कारण लोग उन्हें प्रेम से ‘दादी’ कहकर पुकारते थे।
वर्ष 1969 में ब्रह्मा बाबा के अव्यक्त होने के बाद दादी प्रकाशमणि जी ने 2007 तक 38 वर्षों तक ब्रह्माकुमारीज़ संस्था का नेतृत्व किया। उनके नेतृत्व में संस्था का विस्तार 2-3 केंद्रों से बढ़कर 140 से अधिक देशों में 8500 से अधिक केंद्रों तक हुआ। उन्होंने राजयोग के माध्यम से व्यक्तित्व विकास, मानसिक शांति और आध्यात्मिक जागृति का संदेश विश्वभर में पहुंचाया।
दादी प्रकाशमणि जी ने यह सिद्ध किया कि महिलाएं आध्यात्मिक और प्रशासनिक दोनों क्षेत्रों में प्रभावी नेतृत्व कर सकती हैं। विश्व शांति के लिए उनके योगदान को भी याद किया गया। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा उन्हें सात बार शांति दूत के रूप में आमंत्रित किया गया तथा वर्ष 1986 में उन्हें ‘यूएन मैसेंजर ऑफ पीस’ के सम्मान से नवाजा गया।
दादी जी सदैव पवित्रता, शांति, प्रेम और मानवीय मूल्यों को जीवन का आधार मानती थीं। भारत सरकार सहित कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया। वे विश्वभर के लाखों लोगों के लिए आध्यात्मिक मार्गदर्शक और मातृ स्वरूप बन गई थीं।
कार्यक्रम में दादी प्रकाशमणि जी के विचारों को भी स्मरण किया गया। उनके प्रमुख संदेशों में ‘स्वयं को बदलने से संसार में परिवर्तन की शुरुआत’, ‘शांत मन को शक्तिशाली मन’ तथा ‘प्रेम और सेवा को बांटने से उसके बढ़ने’ का भाव प्रमुख रहा।
इस अवसर पर दादी प्रकाशमणि जी के तैलीय चित्र पर माल्यार्पण किया गया। उपस्थित लोगों ने उनके जीवन से प्रेरणा लेते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने तथा आध्यात्मिक सेवा के लिए स्वयं को समर्पित करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में अरविंद, दिनेश, दीपक, प्रकाश भाई, इशा बहन, जागृति बहन, बंटी बहन, अमृता, पद्मा माता, मुन्नी माता सहित संस्था से जुड़े भाई-बहनों एवं शहर के अनेक लोग उपस्थित रहे और कार्यक्रम में सहयोग प्रदान किया। कार्यक्रम का समापन आध्यात्मिक संदेश ‘ओम शांति’ के साथ हुआ।
















