


राघोपुर के चैती दुर्गा और बजरंगबली मंदिर
@ देखते ही देखते राघोपुर के चैती दुर्गा और बजरंगबली मंदिर हुए विलीन, 30 साल की आस्था पर टूटा कटाव का कहर।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। वह मंजर जिसने राघोपुर के लोगों की आंखों को नम कर दिया। देखते ही देखते मां गंगा की तेज धार ने आस्था के उन दो केंद्रों को अपने आगोश में ले लिया, जहां पिछले करीब तीन दशकों से पूजा की घंटियां गूंजती थीं। राघोपुर चैती दुर्गा मंदिर और बजरंगबली मंदिर अब गंगा की लहरों में विलीन हो चुके हैं। राघोपुर-खैरपुर क्षेत्र में गंगा के भीषण कटाव से करीब 250 मीटर लंबा जमींदारी बांध नदी में समा गया है। कटाव वाले स्थान पर नदी की गहराई करीब 5 से 16 मीटर तक दर्ज की गई है। इससे पास से गुजर रही थाना बिहपुर-महादेवपुर रेलवे लाइन पर भी खतरा बढ़ गया है।
मंगलवार की सुबह राघोपुर के लिए एक ऐसी खबर लेकर आई, जिसे सुनकर हर कोई स्तब्ध रह गया। वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का प्रतीक रहे दोनों मंदिर कटाव की भेंट चढ़ गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, करीब सुबह 9:16 बजे देखते ही देखते मंदिर गंगा की तेज धारा में समा गए।
कुछ पल पहले तक जहां मंदिरों का अस्तित्व था, वहां देखते ही देखते सिर्फ गंगा की लहरें रह गईं। यह दृश्य देखकर मौके पर मौजूद लोगों की आंखें भर आईं। कोई मंदिरों को निहारता रहा तो कोई उन दिनों को याद करता रहा, जब इन्हीं मंदिरों में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती थी।
तीन दशक की आस्था को अपने साथ ले गई गंगा:
ग्रामीणों के अनुसार रेलवे की जमीन पर जन सहयोग से करीब 30 वर्ष पहले दोनों मंदिरों का निर्माण कराया गया था। तब से ये मंदिर राघोपुर की धार्मिक पहचान का अभिन्न हिस्सा बने हुए थे। चैती दुर्गा पूजा के दौरान यहां भक्ति का अलग ही रंग दिखाई देता था। बजरंगबली मंदिर में भी श्रद्धालु नियमित रूप से पूजा-अर्चना करने पहुंचते थे। इन मंदिरों से लोगों का रिश्ता केवल ईश्वर की आराधना तक सीमित नहीं था, बल्कि इनके साथ परिवारों की यादें, पीढ़ियों की आस्था और अनगिनत भावनाएं जुड़ी थीं।
सुबह से कट रही थी रेलवे की जमीन:
अंगिका कवि सह गीतकार ग्रामीण त्रिलोकी नाथ दीवाकर ने बताया कि राघोपुर पंचायत, प्रखंड खरीक में कटाव की स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। उनके अनुसार रेलवे स्टेशन की जमीन भी सुबह करीब सात बजे से ही कटाव की चपेट में है।
राघोपुर बांध में आई दरार अब पूरे पंचायत के लिए चिंता का विषय बन गई है। जमींदारी बांध का हिस्सा पूरब की तरफ कट चुका है और अब कटाव रेलवे की जमीन की ओर बढ़ रहा है। कटाव की रफ्तार को देखते हुए करीब दो से ढाई हजार की आबादी प्रभावित हुई है। आने वाले समय में खतरा और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
जिस अनहोनी का डर था, आखिर वही हुआ
गंगा की धारा काफी समय से लगातार जमीन को काट रही थी। मंदिरों के आसपास की जमीन धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही थी। कभी जहां आरती होती थी, घंटियां बजती थीं और मां दुर्गा व बजरंगबली के जयकारे गूंजते थे, आज वहां गंगा बह रही है। राघोपुर के लोगों के लिए यह केवल ईंट-पत्थर से बने दो मंदिरों का खत्म होना नहीं है। यह उनकी तीस वर्षों की आस्था, उनकी परंपरा और उनकी स्मृतियों का गंगा में समा जाना है। आज गंगा की लहरों में सिर्फ मंदिरों का मलबा नहीं बह रहा, बल्कि राघोपुर के लोगों की आंखों से निकले आंसू और टूटे हुए दिलों की कहानी भी बह रही है।

















