


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। गंगा में बढ़ता जलस्तर जहां लोगों के लिए परेशानी का सबब बन रहा है, वहीं इसका एक अनोखा असर नदी की ‘जल की रानियों’ पर भी दिखाई दे रहा है। विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभ्यारण्य से दर्जनों डॉल्फिन भागलपुर के शहरी नदी तटों की ओर पहुंच गई हैं। बुढ़ानाथ, बरारी और बाबुपुर जैसे इलाकों में इनकी मौजूदगी ने लोगों का ध्यान खींचा है।
बताया जा रहा है कि गंगा की मुख्य धारा में तेज बहाव के कारण डॉल्फिन अपेक्षाकृत शांत और सुरक्षित पानी की तलाश में तटीय इलाकों की ओर आ गई हैं। यानी जिस बढ़े जलस्तर को इंसान खतरे के रूप में देख रहा है, उसी पानी ने डॉल्फिन को अपना ठिकाना बदलने के लिए मजबूर कर दिया है।
सुल्तानगंज से कहलगांव, बटेश्वरनाथ के बीच करीब 60 किलोमीटर में फैला विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभ्यारण्य भारत का एकमात्र गंगा डॉल्फिन अभ्यारण्य है। सामान्य परिस्थितियों में यही क्षेत्र डॉल्फिन का प्रमुख प्राकृतिक आवास माना जाता है। लेकिन गंगा के उफान ने उन्हें अपने सामान्य क्षेत्र से बाहर निकलकर शहर के किनारों यानी शांत जलधारा तक आने को मजबूर कर दिया है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार डॉल्फिन अपेक्षाकृत शांत और स्थिर जलधारा वाले हिस्सों को पसंद करती हैं। तेज बहाव से बचने के लिए वे नदी के कम प्रवाह वाले हिस्सों में शरण ले सकती हैं।

शहरी घाटों पर डॉल्फिन की मौजूदगी भले ही लोगों के लिए कौतूहल और आकर्षण का विषय बन गई हो, लेकिन वन विभाग के सामने असली चुनौती अब शुरू हो सकती है। भागलपुर में बाढ़ के तेज बहाव के कारण दर्जनों डॉल्फिन अपने सामान्य क्षेत्र से हटकर बूढ़ानाथ और बाबूपुर के आसपास पहुंच गई हैं। प्रकृति का यह नज़ारा वाकई बेहद रोचक है।भागलपुर के बूढ़ानाथ, बाबूपुर की गंगा धार में डॉल्फिन का नया ठिकाना देखा जा रहा है।
खासकर जलकुंभी से घिरे इन हिस्से इनके लिए मुश्किल पैदा कर सकते हैं। यदि जलस्तर अचानक नीचे जाता है और डॉल्फिन गहरे पानी की ओर वापस नहीं लौट पातीं, तो उनके जीवन पर संकट खड़ा हो सकता है। वन विभाग लगातार स्थिति पर नजर रख रहा है। डॉल्फिन की सुरक्षा के लिए लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है, ताकि भीड़, नावों की आवाजाही या किसी तरह की छेड़छाड़ से इन दुर्लभ जलीय जीवों को नुकसान न पहुंचे।
विशेषज्ञों को उम्मीद है कि जलस्तर सामान्य होने के बाद डॉल्फिन वापस अपने प्राकृतिक आवास की ओर लौट जाएंगी। फिलहाल भागलपुर के घाटों पर इनकी मौजूदगी यह बताने के लिए काफी है कि गंगा का बढ़ता पानी सिर्फ इंसानी बस्तियों की तस्वीर नहीं बदल रहा, बल्कि नदी में रहने वाले जीवों की दुनिया भी बदल रहा है।
















