


पूर्णिया। पूर्णिया स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल (GMCH) में सोमवार को उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब एक कैंसर पीड़ित महिला की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि इंटर्न और जूनियर डॉक्टरों के साथ मारपीट की गई तथा इमरजेंसी वार्ड में व्यापक तोड़फोड़ कर दी गई।
मिली जानकारी के अनुसार, कैंसर से पीड़ित महिला को गंभीर हालत में परिजन अस्पताल लेकर पहुंचे थे, लेकिन डॉक्टरों की जांच में उसे मृत घोषित कर दिया गया। बताया जा रहा है कि महिला की मौत अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो चुकी थी। हालांकि, यह बात परिजनों को नागवार गुजरी और वे आक्रोशित हो उठे।
आरोप है कि परिजनों ने इमरजेंसी वार्ड में मौजूद इंटर्न डॉक्टरों को घेर लिया और उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। इस दौरान एक महिला डॉक्टर के साथ भी बदसलूकी की गई। बीच-बचाव करने आए अन्य डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को भी नहीं बख्शा गया, जिससे कई लोग घायल हो गए। घटना के दौरान अस्पताल के गेट, खिड़कियों और शीशों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया, जिससे पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई।
हंगामे के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए। घटना से आक्रोशित इंटर्न डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ ने विरोध जताते हुए अस्पताल में प्रदर्शन किया और आरोपियों की अविलंब गिरफ्तारी की मांग की। डॉक्टरों का कहना है कि लगातार ऐसी घटनाओं से उनका मनोबल टूट रहा है और असुरक्षा का माहौल बनता जा रहा है।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन हरकत में आया और तीन थानों की पुलिस मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। फणीश्वर नाथ रेणु टीओपी की प्रभारी राजनंदनी ने मौके पर पहुंचकर इंटर्न और जूनियर डॉक्टरों के बयान दर्ज किए और आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी गई है।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. संजय कुमार ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि महिला की मौत अस्पताल आने से पहले ही हो चुकी थी और डॉक्टरों ने नियमानुसार जांच के बाद ही उसे मृत घोषित किया। उन्होंने डॉक्टरों के साथ मारपीट और अस्पताल में तोड़फोड़ की घटना को बेहद गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
फिलहाल अस्पताल परिसर में सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। प्रशासन का कहना है कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था और डॉक्टरों की कार्य स्थितियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही, यह भी स्पष्ट हुआ है कि संवेदनशील परिस्थितियों में अस्पतालों में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और जनजागरूकता की कितनी आवश्यकता है, ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
















