


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। कभी जिस समाज में लड़कियों का खेल के मैदान तक पहुंचना आसान नहीं था, आज उसी घोघा की बेटियां राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह बनी हैं रिंकी कुमारी, जिन्हें आज पूरा इलाका प्यार से ‘खेल वाली आंटी’ के नाम से जानता है।
रिंकी ने 3 मार्च 2011 को एक संकल्प लिया था – खेल के माध्यम से लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाना और समाज की पुरानी सोच को बदलना। डेढ़ दशक की लगातार मेहनत का नतीजा है कि आज उनकी टीम में वॉलीबॉल, कुश्ती, कबड्डी, नौकायान, तैराकी, दौड़ और लाठी प्रतियोगिता जैसी विभिन्न खेल विधाओं की दर्जनों महिला खिलाड़ी शामिल हैं। इनमें से कई खिलाड़ी खेल कोटे के माध्यम से सरकारी और प्रशासनिक सेवाओं में अपनी पहचान बना चुकी हैं।
खेल नहीं, सामाजिक बदलाव का अभियान:
रिंकी कुमारी कहती हैं, ‘खेल के माध्यम से नई दौर में पुरानी विचारधारा को बदलना मेरा लक्ष्य है।’ यही सोच उनके पूरे अभियान की ताकत बनी।
शुरुआत आसान नहीं थी। ग्रामीण परिवेश में अभिभावकों को बेटियों को खेल के लिए तैयार करना किसी चुनौती से कम नहीं था। कई बार विरोध और फटकार भी झेलनी पड़ी, लेकिन रिंकी पीछे नहीं हटीं। उन्होंने स्कूलों के प्रधानाचार्यों और अभिभावकों से लगातार संवाद किया और धीरे-धीरे बेटियों का भरोसा भी जीता और परिवारों का भी।
घोघा थाना परिसर में रिंकी अपनी निगरानी में लड़कियों को नियमित वॉलीबॉल का अभ्यास कराती हैं। वहीं कुश्ती, कबड्डी, दौड़ और लाठी प्रतियोगिता के लिए लगभग एक किलोमीटर दूर नागादेव अर्जुन मैदान (अमरूद बागान) तक जाकर प्रशिक्षण देती हैं। अभ्यास के दौरान वह हर समय खिलाड़ियों के साथ मौजूद रहती हैं।
रिंकी की टीम की कई खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर: अपना दमखम दिखा चुकी हैं। वॉलीबॉल में कश्मीरा, रोमा, मोना, आरती, नीतू, प्रतिभा, रितु, अंशु, गुंजन, रिया, मोनिका, विभा, साक्षी और कल्पना राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग ले चुकी हैं। इनमें रोमा और प्रतिभा खेल कोटे के माध्यम से प्रशासनिक सेवा में चयनित हो चुकी हैं।
वहीं कुश्ती में आदित्य प्रिया, नीलम, गुंजन, मुस्कान और तेतरी तथा नौकायान में रोमा, संध्या, राजलक्ष्मी, मधु, मोनी और प्रतिभा कुमारी ने भी राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।
बचपन का सपना, आज सैकड़ों बेटियों की उड़ान
सबौर थाना क्षेत्र के इंग्लिश फरका गांव की रहने वाली रिंकी की शादी वर्ष 2008 में घोघा के जानीडीह निवासी उपेंद्र यादव से हुई। बचपन में खेल का शौक होने के बावजूद सामाजिक बंदिशों के कारण वह अपने सपनों को पूरा नहीं कर सकीं। शादी के बाद पति का सहयोग मिला तो उन्होंने तय किया कि जो सपना उनका अधूरा रह गया, वह किसी दूसरी बेटी का अधूरा नहीं रहने देंगी। आज वह अपनी बेटी को भी विभिन्न खेलों का प्रशिक्षण दे रही हैं।
रिंकी कुमारी ने यह साबित कर दिया है कि बदलाव के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि मजबूत इरादों की जरूरत होती है। उनकी मेहनत ने घोघा की बेटियों को खेल के मैदान से सरकारी नौकरी तक पहुंचाया है। अब पूरे क्षेत्र में लोग उन्हें सिर्फ एक कोच नहीं, बल्कि बेटियों के भविष्य को संवारने वाली ‘खेल वाली आंटी’ के रूप में सम्मान देते हैं।
















