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प्रदीप विद्रोही
पटना। सावन की आहट के साथ जहां खेतों में धान की हरियाली छा जानी चाहिए थी, वहीं बिहार के बड़े हिस्से में खेत अब भी बारिश की आस में सूने पड़े हैं। राज्य में धान की रोपनी की रफ्तार मौसम के मुकाबले काफी धीमी है। हालात यह हैं कि अब भी करीब 35 प्रतिशत रोपनी बाकी है और दक्षिण बिहार के कई जिले गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। बारिश की लगातार कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जिन खेतों में रोपनी हो चुकी है, वहां भी नमी खत्म होने लगी है और पौधे सूखने के कगार पर हैं।
कृषि विभाग के अनुसार चालू खरीफ मौसम में 37.90 लाख हेक्टेयर में धान की रोपनी का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन 27 जुलाई तक केवल 23.33 लाख हेक्टेयर में ही रोपनी हो सकी है, जो लक्ष्य का लगभग 62 प्रतिशत है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक एक जून से 28 जुलाई तक बिहार में सामान्य से 40 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इसका सीधा असर खेती पर दिखाई दे रहा है।
दक्षिण बिहार सबसे अधिक प्रभावित
उत्तर बिहार के कई जिलों में रोपनी की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है, लेकिन दक्षिण बिहार के अधिकांश जिले अभी भी काफी पीछे हैं। गया (13%), जमुई (9%), शेखपुरा (19%), औरंगाबाद (21%), नवादा (22%), लखीसराय (28%), बांका (29%), जहानाबाद (32%) और अरवल (40%) जैसे जिलों में अभी तक आधी रोपनी भी पूरी नहीं हो सकी है। इन इलाकों में खेतों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंचने से किसान मजबूर होकर बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
इसके विपरीत उत्तर बिहार के किशनगंज (99%), पश्चिम चंपारण (98%), पूर्वी चंपारण (96%), मधेपुरा (93%), गोपालगंज (92%), सहरसा (92%) और मुजफ्फरपुर (90%) जैसे जिलों में रोपनी लगभग पूरी हो चुकी है।
जहां रोपनी हुई, वहां भी बढ़ी चिंता
किसानों की परेशानी केवल रोपनी तक सीमित नहीं है। जिन क्षेत्रों में धान की रोपनी पूरी हो चुकी है, वहां भी बारिश नहीं होने से खेतों की नमी तेजी से खत्म हो रही है। लगातार सूखते खेतों के कारण धान के पौधों की बढ़वार प्रभावित होने लगी है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो उत्पादन पर इसका बड़ा असर पड़ेगा।
किसानों की जुबानी संकट
बांका के किसान दीपक कुमार बताते हैं कि पानी की भारी कमी के कारण उनके गांव में रोपनी की शुरुआत ही नहीं हो पाई है।
रोहतास के किसान राजेश कुमार का कहना है कि हाल के दिनों में कुछ किसानों ने रोपनी शुरू की है, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने से काम बहुत धीमी गति से चल रहा है।
वहीं भागलपुर के किसान संजीव कुमार कहते हैं कि उनके इलाके में सामान्य तौर पर रोपनी थोड़ी देर से होती है, लेकिन इस बार देरी सामान्य से कहीं अधिक हो चुकी है।
20 फीसदी तक घट सकती है पैदावार
कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रकाश सिंह के अनुसार इस वर्ष मानसून की स्थिति संतोषजनक नहीं है। उनका कहना है कि यदि 5 अगस्त तक रोपनी पूरी हो जाती है, तो औसत उत्पादन की उम्मीद बनी रहेगी। लेकिन यदि बारिश की कमी जारी रही और रोपनी समय पर पूरी नहीं हुई, तो राज्य में धान का उत्पादन 15 से 20 प्रतिशत तक घट सकता है।
कृषि विभाग की वैकल्पिक तैयारी
संभावित सूखे की स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग ने वैकल्पिक फसल योजना तैयार की है। किसानों को सिंचाई के लिए डीजल अनुदान देने की तैयारी की जा रही है। साथ ही मक्का, ज्वार, बाजरा और दलहनी फसलों के मुफ्त बीज उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है। जिन क्षेत्रों में रोपनी संभव नहीं हो पाएगी, वहां किसानों को धान की सीधी बुआई अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
खरीफ फसलों की स्थिति
खरीफ मौसम 2026-27 में राज्य का लक्ष्य 42.19 लाख हेक्टेयर में धान, मक्का, दलहन और मोटे अनाज की खेती का है। अब तक कुल लक्ष्य का लगभग 63.52 प्रतिशत क्षेत्र आच्छादित हो चुका है। वहीं 2.71 लाख हेक्टेयर में मक्का की बुआई के लक्ष्य के मुकाबले लगभग 90 प्रतिशत बुआई पूरी हो चुकी है।
बदलते मौसम ने बढ़ाई चुनौती
सावन की शुरुआत से पहले जिस समय बिहार के खेतों में धान की लहलहाती फसल दिखनी चाहिए थी, उस समय राज्य का बड़ा हिस्सा बादलों की बेरुखी से जूझ रहा है। आने वाले एक-दो सप्ताह की बारिश अब केवल रोपनी ही नहीं, बल्कि पूरे खरीफ सीजन और लाखों किसानों की आजीविका के लिए निर्णायक साबित होगी।

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