


@ कहलगांव में किसानों को उन्नत मत्स्य पालन तकनीक, बीमा, सरकारी योजनाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म की दी गई जानकारी
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। बिहार एक्वाकल्चर इंप्रूवमेंट प्रोग्राम (BAIP) के अंतर्गत कहलगांव में किसानों को उन्नत मत्स्य पालन तकनीकों, सरकारी योजनाओं, बीमा सुविधाओं, डिजिटल प्लेटफॉर्म और बाजार से जुड़ी जानकारी देने के उद्देश्य से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिला मत्स्य पदाधिकारी, भागलपुर के सहयोग से किसानों को आधुनिक मत्स्य पालन की विभिन्न तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के दौरान CIFA, भुवनेश्वर के निर्देश पर जयन्ती रेहू और अमृत कैटला प्रजाति के बीज का संचयन कहलगांव स्थित शोभनाथपुर गांव निवासी सुमिता सिंह के फिश फार्म में किया गया। बताया गया कि इन उन्नत प्रजातियों के बीज किसानों को भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इनके पालन से सामान्य प्रजातियों की तुलना में वृद्धि एवं उत्पादन में करीब 35 प्रतिशत तक अधिक लाभ मिलने की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों के अनुसार, उन्नत प्रजातियों को बढ़ावा मिलने से मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा हो सकती हैं।
उन्नत प्रजातियों को अपनाने पर जोर:
कार्यक्रम में किसानों को जयन्ती रोहू एवं अमृत कैटला जैसी उन्नत मछली प्रजातियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। प्रगतिशील नर्सरी किसान विभु कुमार ने इन प्रजातियों के पालन से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने इनके बेहतर वृद्धि प्रदर्शन, अच्छी जीवित रहने की दर और उत्पादन में संभावित लाभ के बारे में किसानों को जानकारी दी।

NFDP ऐप की दी गई जानकारी:
किसानों को National Fisheries Digital Platform (NFDP) App के बारे में भी जागरूक किया गया। बताया गया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से मत्स्य किसानों को पंजीकरण, सरकारी योजनाओं, ऋण सुविधा, बीमा और अन्य सहायता सेवाओं तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।
बीमा और वित्तीय योजनाओं पर चर्चा
बैठक में Group Accident Insurance Scheme (GAIS) तथा PMMSY के तहत Aquaculture Crop Insurance Scheme की जानकारी किसानों को दी गई। किसानों को योजनाओं की पात्रता, बीमा कवरेज और दावा प्रक्रिया के साथ-साथ पात्र घटकों के अंतर्गत उपलब्ध एक लाख रुपये तक के एकमुश्त प्रोत्साहन के बारे में भी जानकारी दी गई।
जल गुणवत्ता जांच का किया गया प्रदर्शन:
कार्यक्रम में Aquapreneurship Development पर भी जोर दिया गया। मत्स्य किसानों और ग्रामीण युवाओं को एक्वाकल्चर वैल्यू चेन से जुड़े उद्यमिता एवं स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी दी गई।
इसके अलावा कार्यक्रम स्थल के तालाब से जल के नमूने लेकर जल गुणवत्ता का व्यावहारिक परीक्षण किया गया। किसानों को बताया गया कि मछलियों के बेहतर स्वास्थ्य, वृद्धि और उत्पादन के लिए पानी की गुणवत्ता की नियमित निगरानी बेहद महत्वपूर्ण है।

















