
भागलपुर में सशक्त समिति की बैठक में 8 बंदियों के मामलों पर विचार, 11 हजार रुपये का जुर्माना जमा करने की अनुशंसा
भागलपुर : गरीबी के कारण जुर्माना नहीं भर पाने वाले बंदियों को राहत देने की दिशा में भागलपुर जिला प्रशासन ने पहल की है। गरीब बंदियों को जुर्माना चुकाने और जमानत हासिल करने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की योजना के क्रियान्वयन को लेकर गठित सशक्त समिति (Empowered Committee) की बैठक बुधवार को जिला पदाधिकारी, भागलपुर की अध्यक्षता में हुई।

बैठक में जुर्माना जमा नहीं कर पाने के कारण जेल में निरुद्ध कुल आठ सजावार बंदियों के मामलों पर विचार किया गया। इनमें से पांच बंदियों को योजना के तहत सहायता के लिए योग्य पाया गया। इन बंदियों पर लंबित कुल 11,000 रुपये का जुर्माना जमा करने की अनुशंसा की गई।
वहीं, प्रोबेशन पदाधिकारी की जांच रिपोर्ट नहीं मिलने के कारण दो बंदियों के मामले प्रक्रियाधीन रखे गए। एक बंदी को एक से अधिक वादों में सजा होने और अन्य विचाराधीन मामले लंबित रहने के कारण योजना के लिए अयोग्य पाया गया।
गृह विभाग को भेजी जाएगी योग्य बंदियों की सूची
योग्य पाए गए पांच बंदियों की सूची विभागीय स्वीकृति के लिए 15 अक्टूबर 2026 तक गृह विभाग, बिहार, पटना को भेजी जाएगी। स्वीकृति के बाद राशि उपलब्ध होते ही संबंधित बंदियों का जुर्माना जमा कर उनकी रिहाई की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

बैठक में वरीय पुलिस अधीक्षक, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव, कारा के न्यायाधीश प्रभारी, शहीद जुब्बा सहनी केंद्रीय कारा के अधीक्षक अमित कुमार, विशेष केंद्रीय कारा के अधीक्षक राजीव झा सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
रिहाई के बाद पुनर्वास पर भी जोर
जिला पदाधिकारी ने निर्देश दिया कि जेल से रिहा होने के बाद बंदियों का सामाजिक और व्यावहारिक पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए, ताकि वे सामान्य जीवन में लौट सकें।
उन्होंने उत्पाद अधिनियम के छोटे मामलों में बंद बंदियों को प्रोबेशन पदाधिकारी की निगरानी में एक माह तक नशामुक्ति केंद्र में रखने का निर्देश भी दिया। प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य आर्थिक तंगी के कारण जेल में रह रहे पात्र बंदियों को राहत देना और उनकी रिहाई के बाद पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित करना है।















