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पूर्णिया। अपनी बेबाक शैली के लिए चर्चित सांसद पप्पू यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान महिला आयोग के नोटिस और राजनीतिक विरोधियों पर तीखा हमला बोला। महिलाओं पर दिए गए अपने पूर्व बयान पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि वे अपने विचारों पर कायम हैं और आधी आबादी के सम्मान के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।

महिला आयोग के नोटिस को बताया ‘रद्दी’
सांसद ने महिला आयोग द्वारा भेजे गए नोटिस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मैंने उस नोटिस को रद्दी की टोकरी में फेंक दिया है। मैं मां का दूध पीकर बड़ा हुआ हूं और महिलाओं के सम्मान की रक्षा करना मेरा कर्तव्य है।” उन्होंने कहा कि आलोचनाओं से वे डरने वाले नहीं हैं और अपने मुद्दों पर डटे रहेंगे।



राजनीति और व्यवस्था पर गंभीर आरोप
प्रेस वार्ता में पप्पू यादव ने कई बड़े दावे किए। उन्होंने कहा कि चुनावी हलफनामों के अनुसार देश के हजारों जनप्रतिनिधियों में से सैकड़ों पर यौन शोषण के आरोप हैं। उन्होंने मांग की कि दुष्कर्म के दोषियों को 48 घंटे के भीतर फांसी दी जाए और ऐसे मामलों में शामिल नेताओं को आजीवन चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया जाए।

फिल्म इंडस्ट्री और सुशांत मामले का जिक्र
सांसद ने फिल्म इंडस्ट्री में कास्टिंग काउच का मुद्दा उठाते हुए दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सुशांत की आवाज को जांच के नाम पर दबा दिया गया।



अश्लीलता पर भी साधा निशाना
उन्होंने भोजपुरी गीतों में बढ़ती अश्लीलता पर भी चिंता जताई। कुछ गानों का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे कलाकारों को सरकारी सुरक्षा मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है।

सीमांचल-कोसी की मिट्टी का कर्ज चुकाने की बात
भावुक होते हुए सांसद ने कहा, “सीमांचल और कोसी की मिट्टी ने मुझे संघर्ष करना सिखाया है। मैं यहां के लोगों और खासकर महिलाओं के सम्मान के लिए हर लड़ाई लड़ने को तैयार हूं।” उन्होंने कहा कि राजनीति का माहौल महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं रह गया है, जिसे बदलना जरूरी है।

अंत में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका बयान किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार के उद्देश्य से था और वे महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष करते रहेंगे।

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