


पूर्णिया विश्वविद्यालय पर छात्रों से अवैध वसूली का लगाया आरोप, शुल्क वापस लेने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
पूर्णिया। पूर्णिया विश्वविद्यालय में स्नातक नामांकन के लिए लिए जा रहे आवेदन शुल्क के विरोध में छात्र राजद के नेता एवं पूर्णिया विश्वविद्यालय छात्र संघ अध्यक्ष पीयूष पुजारा शनिवार से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठ गए। विश्वविद्यालय परिसर में शुरू हुए इस आंदोलन के माध्यम से उन्होंने नामांकन आवेदन शुल्क को समाप्त करने तथा छात्रों पर आर्थिक बोझ कम करने की मांग उठाई है।
अनशन की शुरुआत करते हुए पीयूष पुजारा ने कहा कि पूर्णिया विश्वविद्यालय द्वारा स्नातक नामांकन के लिए छात्रों से 600 रुपये आवेदन शुल्क लिया जा रहा है, जो सीमांचल जैसे आर्थिक रूप से पिछड़े क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए अत्यधिक बोझ साबित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस शुल्क के बदले छात्रों को कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं मिल रही है।
पीयूष पुजारा ने कहा कि विश्वविद्यालय की स्थापना के शुरुआती वर्षों में प्रवेश परीक्षा आयोजित किए जाने के कारण आवेदन शुल्क लिया जाता था, लेकिन बाद के वर्षों में प्रवेश परीक्षा की प्रक्रिया समाप्त हो गई। इसके बावजूद छात्रों से लगातार शुल्क वसूला जाता रहा। उन्होंने दावा किया कि पिछले कई वर्षों में नामांकन प्रक्रिया के माध्यम से करोड़ों रुपये छात्रों से वसूले गए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में विश्वविद्यालय में सामर्थ पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन नामांकन प्रक्रिया संचालित की जा रही है, जो भारत सरकार का पोर्टल है। ऐसे में छात्रों से इतना अधिक शुल्क लेना उचित नहीं है। उन्होंने पड़ोसी विश्वविद्यालयों का उदाहरण देते हुए कहा कि जहां बीएन मंडल विश्वविद्यालय में आवेदन शुल्क लगभग 150 रुपये और तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में करीब 200 रुपये है, वहीं पूर्णिया विश्वविद्यालय में 600 रुपये शुल्क लिया जा रहा है।
अनशनकारी छात्र नेता ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर छात्रों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्तिगत हित के लिए नहीं, बल्कि हजारों छात्रों के अधिकारों और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक आवेदन शुल्क में कमी या उसे समाप्त करने संबंधी ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका अनिश्चितकालीन अनशन जारी रहेगा।
अनशन को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में छात्र संगठनों और विद्यार्थियों के बीच चर्चा का माहौल बना हुआ है। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा की जा रही है।
नामांकन शुल्क के विरोध में अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे पीयूष पुजारा
पूर्णिया विश्वविद्यालय पर छात्रों से अवैध वसूली का लगाया आरोप, शुल्क वापस लेने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
पूर्णिया। पूर्णिया विश्वविद्यालय में स्नातक नामांकन के लिए लिए जा रहे आवेदन शुल्क के विरोध में छात्र राजद के नेता एवं पूर्णिया विश्वविद्यालय छात्र संघ अध्यक्ष पीयूष पुजारा शनिवार से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठ गए। विश्वविद्यालय परिसर में शुरू हुए इस आंदोलन के माध्यम से उन्होंने नामांकन आवेदन शुल्क को समाप्त करने तथा छात्रों पर आर्थिक बोझ कम करने की मांग उठाई है।
अनशन की शुरुआत करते हुए पीयूष पुजारा ने कहा कि पूर्णिया विश्वविद्यालय द्वारा स्नातक नामांकन के लिए छात्रों से 600 रुपये आवेदन शुल्क लिया जा रहा है, जो सीमांचल जैसे आर्थिक रूप से पिछड़े क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए अत्यधिक बोझ साबित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस शुल्क के बदले छात्रों को कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं मिल रही है।
पीयूष पुजारा ने कहा कि विश्वविद्यालय की स्थापना के शुरुआती वर्षों में प्रवेश परीक्षा आयोजित किए जाने के कारण आवेदन शुल्क लिया जाता था, लेकिन बाद के वर्षों में प्रवेश परीक्षा की प्रक्रिया समाप्त हो गई। इसके बावजूद छात्रों से लगातार शुल्क वसूला जाता रहा। उन्होंने दावा किया कि पिछले कई वर्षों में नामांकन प्रक्रिया के माध्यम से करोड़ों रुपये छात्रों से वसूले गए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में विश्वविद्यालय में सामर्थ पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन नामांकन प्रक्रिया संचालित की जा रही है, जो भारत सरकार का पोर्टल है। ऐसे में छात्रों से इतना अधिक शुल्क लेना उचित नहीं है। उन्होंने पड़ोसी विश्वविद्यालयों का उदाहरण देते हुए कहा कि जहां बीएन मंडल विश्वविद्यालय में आवेदन शुल्क लगभग 150 रुपये और तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में करीब 200 रुपये है, वहीं पूर्णिया विश्वविद्यालय में 600 रुपये शुल्क लिया जा रहा है।
अनशनकारी छात्र नेता ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर छात्रों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्तिगत हित के लिए नहीं, बल्कि हजारों छात्रों के अधिकारों और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक आवेदन शुल्क में कमी या उसे समाप्त करने संबंधी ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका अनिश्चितकालीन अनशन जारी रहेगा।
अनशन को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में छात्र संगठनों और विद्यार्थियों के बीच चर्चा का माहौल बना हुआ है। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा की जा रही है।
















