


पूर्णिया। जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार के निर्देश एवं जिला प्रोग्राम पदाधिकारी सुगंधा शर्मा के मार्गदर्शन में 9 अप्रैल से 23 अप्रैल तक संचालित पोषण पखवाड़ा कार्यक्रम का गुरुवार को समापन हो गया। इस दौरान जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर माइक्रोप्लान के अनुसार विभिन्न जागरूकता एवं स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों का आयोजन किया गया।
समापन दिवस पर विशेष ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (VHSND), पोषण एवं वृद्धि निगरानी, पोषण रैली, भाषा विकास एवं कहानी सत्र, परिवार आधारित कहानी सत्र (दादा-दादी की सहभागिता), खिलौना दान अभियान तथा पोषण मेला का आयोजन किया गया। इन गतिविधियों के माध्यम से समुदाय में कुपोषण को कम करने और सही पोषण के प्रति जागरूकता फैलाने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम के तहत बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण और पोषण संबंधी परामर्श की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही जन-जागरूकता के लिए रैली, साइकिल रैली और पदयात्रा भी निकाली गई, जिसमें पोषण के पांच सूत्र—बचपन के पहले 1000 दिन, एनीमिया, दस्त, स्वच्छता और संतुलित आहार—पर लोगों को जागरूक किया गया।
भाषा विकास एवं कहानी सत्र के माध्यम से बच्चों को खेल-खेल में भाषा सीखने के लिए प्रेरित किया गया, वहीं दादा-दादी की कहानियों के जरिए बच्चों को संस्कार और जीवन मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया गया। खिलौना दान अभियान के तहत लोगों से अपील की गई कि वे अपने घरों में रखे अनुपयोगी खिलौने आंगनबाड़ी केंद्रों को दान करें, ताकि बच्चों के सीखने और विकास में मदद मिल सके।
पोषण मेला में विभिन्न स्टॉल लगाकर संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली के बारे में जानकारी दी गई। “पोषण अपनाओ—बीमारी भगाओ” और “सही आहार—खुशहाल परिवार” जैसे नारों के जरिए लोगों को जागरूक किया गया।
जिला प्रशासन ने बताया कि इस तरह के सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से पोषण के प्रति व्यापक जागरूकता फैलाई गई है। पखवाड़ा का संदेश रहा—“सही पोषण, देश रोशन।”
















