


बिजेंद्र पब्लिक स्कूल में आयोजित हुआ जागरूकता कार्यक्रम, किशोरियों को संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या के प्रति किया गया जागरूक
पूर्णिया। फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया के निर्देशानुसार पूर्णिया ऑब्स एंड गायनी सोसाइटी की ओर से सितंबर माह को पीसीओएस जागरूकता माह के रूप में मनाया गया। इसी क्रम में स्थानीय बिजेंद्र पब्लिक स्कूल में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं को प्रोजेक्टर के माध्यम से पीसीओएस यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

कार्यक्रम का उद्देश्य किशोरियों और महिलाओं में बढ़ रही इस हार्मोन संबंधी समस्या के प्रति जागरूकता फैलाना तथा इसके लक्षणों को समय रहते पहचानने, चिकित्सकीय सलाह लेने और आवश्यक जांच एवं उपचार के प्रति लोगों को जागरूक करना था। चिकित्सकों ने छात्र-छात्राओं को स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने और अपनी दिनचर्या तथा खानपान पर ध्यान देने की सलाह दी।
चिकित्सकों का किया गया स्वागत
कार्यक्रम में पहुंचे चिकित्सकों का विद्यालय के प्राचार्य डॉ. कृष्णा सी. सी. और उप-प्राचार्य सोनिया सचदेवा ने पौधा और उपहार देकर स्वागत किया। इसके बाद चिकित्सकों ने विद्यार्थियों को पीसीओएस से संबंधित विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।

कार्यक्रम में बताया गया कि किशोरावस्था में शरीर में होने वाले हार्मोन संबंधी बदलावों के कारण कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं सामने आ सकती हैं। अनियमित मासिक धर्म, वजन में अचानक बढ़ोतरी, अत्यधिक मुंहासे या चेहरे पर अनचाहे बाल जैसी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय परामर्श लेना जरूरी है।
स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही न बरतें : डॉ. विभा झा
पूर्णिया ऑब्स एंड गायनी सोसाइटी की अध्यक्ष डॉ. विभा झा ने कहा कि महिलाओं और किशोरियों को अपने स्वास्थ्य के प्रति किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मासिक धर्म में अनियमितता या अचानक वजन बढ़ने जैसी समस्याओं को शुरुआत में ही पहचानना जरूरी है।
उन्होंने छात्राओं से कहा कि स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी समस्या को छिपाने या नजरअंदाज करने के बजाय समय पर चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। समय पर जानकारी और चिकित्सकीय सलाह से कई स्वास्थ्य समस्याओं को नियंत्रित किया जा सकता है।
संतुलित आहार और नियमित व्यायाम जरूरी : डॉ. अनुराधा सिन्हा
सोसाइटी की सचिव डॉ. अनुराधा सिन्हा ने कहा कि वर्तमान जीवनशैली और खानपान में बदलाव के कारण किशोरियों में भी पीसीओएस से संबंधित समस्याएं देखने को मिल रही हैं। उन्होंने संतुलित आहार और नियमित व्यायाम को स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
उन्होंने विद्यार्थियों से नियमित शारीरिक गतिविधि करने, पौष्टिक भोजन लेने और अनियमित खानपान से बचने की अपील की।
भ्रांतियों और सामाजिक संकोच को दूर करने पर जोर
डॉ. आरती सिन्हा ने कहा कि पीसीओएस से जुड़ी सामाजिक झिझक और भ्रांतियों को दूर करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि किशोरियों और युवतियों को स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या होने पर बिना झिझक अपने परिवार और चिकित्सक से बात करनी चाहिए। किसी भी समस्या को छिपाने के बजाय समय पर सलाह लेना अधिक महत्वपूर्ण है।
तनावमुक्त जीवनशैली अपनाने की सलाह
डॉ. आसिया रुमान ने तनावमुक्त जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हार्मोन संबंधी असंतुलन से जुड़ी समस्याओं में जीवनशैली की भी भूमिका हो सकती है। उन्होंने चेहरे पर अत्यधिक मुंहासे या अनचाहे बाल जैसी समस्याओं को लगातार बने रहने पर चिकित्सकीय सलाह लेने की बात कही।
उन्होंने युवा पीढ़ी से जंक फूड के अत्यधिक सेवन और अनियमित दिनचर्या से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि किशोरावस्था से ही संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम और अनुशासित दिनचर्या अपनाना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।
समय पर जांच से समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है : डॉ. दिव्यांजली सिंह
डॉ. दिव्यांजली सिंह ने कहा कि सही जानकारी और समय पर चिकित्सकीय जांच एवं उपचार के माध्यम से पीसीओएस को नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने छात्राओं से अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने और किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज नहीं करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर सही जानकारी होना जरूरी है, ताकि अनावश्यक डर और भ्रांतियों से बचा जा सके।
स्वास्थ्य जागरूकता भी शिक्षा का हिस्सा : प्राचार्य
बिजेंद्र पब्लिक स्कूल के प्राचार्य डॉ. कृष्णा सी. सी. ने कहा कि विद्यार्थियों के लिए किताबी ज्ञान के साथ-साथ शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन ही विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है।
उन्होंने छात्र-छात्राओं से कार्यक्रम में मिली स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को अपने परिवार और समाज के लोगों तक पहुंचाने की अपील की।
उप-प्राचार्य ने बताया उपयोगी पहल
विद्यालय की उप-प्राचार्य सोनिया सचदेवा ने कहा कि बदलती जीवनशैली के दौर में इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए काफी उपयोगी हैं। खासकर किशोरियों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बारे में सही जानकारी मिलना जरूरी है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मददगार साबित होते हैं।
कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने चिकित्सकों से स्वास्थ्य संबंधी सवाल भी पूछे। चिकित्सकों ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और जरूरत पड़ने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए प्रेरित किया।
















