


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। शहर की सड़कों पर शुक्रवार को एक ऐसा जुलूस निकला, जिसमें न नारे थे, न भाषण और न ही किसी तरह का शोर। सिर्फ कदमों की आहट और “रघुपति राघव राजा राम” की धुन के बीच नागरिकों ने मौन रहकर लोकतांत्रिक मूल्यों, शांति और नागरिक अधिकारों के समर्थन में अपनी बात कही।
गांधी विचार विभाग स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा से रेलवे स्टेशन चौक स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा तक निकले इस मौन मार्च में शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता, नाट्यकर्मी, संस्कृतिकर्मी और विभिन्न क्षेत्रों के बुद्धिजीवी शामिल हुए। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के पूर्व कुलपति प्रो. मनोज कुमार के नेतृत्व में निकले इस जुलूस की शुरुआत और समापन गांधी जी के प्रिय भजन “रघुपति राघव राजा राम” से हुआ।
प्रतिभागियों का कहना था कि यह मौन किसी निष्क्रियता का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उनका मानना था कि छात्रों और युवाओं की आवाज़ को सुनना तथा उनके शांतिपूर्ण विरोध का सम्मान करना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी जिम्मेदारी है। उन्होंने शिक्षा, रोजगार और नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर संवाद और संवेदनशील समाधान की आवश्यकता पर बल दिया।
मौन जुलूस के दौरान नागरिकों से यह अपील भी की गई कि छात्र आंदोलन को लेकर फैलने वाली अपुष्ट और भ्रामक सूचनाओं से सतर्क रहें। वक्ताओं ने कहा कि अफवाहें किसी भी लोकतांत्रिक आंदोलन को कमजोर कर सकती हैं, इसलिए समाज को केवल प्रमाणित तथ्यों पर भरोसा करना चाहिए और किसी भी उकसावे का हिस्सा बनने से बचना चाहिए।
महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों—अहिंसा, न्याय, समानता और संविधान के प्रति आस्था—को समर्पित इस मार्च में प्रतिभागियों ने लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने, संविधान की मूल भावना की रक्षा करने तथा शिक्षा, न्याय और नागरिक अधिकारों के पक्ष में शांतिपूर्ण ढंग से आवाज़ उठाते रहने का संकल्प दोहराया।
मौन जुलूस में अनिता शर्मा, श्वेता शंकर, मृदुला सिंह, उज्ज्वल घोष, मो. शहबाज, निर्मल कुमार, दीपक कुमार मंडल, रवि कुमार सिंह, सत्येन भाष्कर, मो. बाकिर हुसैन, संजय कुमार सिंह, गौतम कुमार, शांति रमन, हरेंद्र कुमार, रत्नाकर रत्न, मिथलेश कुमार, जयंत जलद, सुभाष प्रसाद, उमेश नीरज सहित बड़ी संख्या में नागरिक शामिल हुए।
















